छत्तीसगढ़ धमतरी जिले के भोथीपार गांव में मुनगा पेड़ बना विवाद की जड़, 14 परिवारों का हुआ सामाजिक बहिष्कार

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छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के भोथीपार गांव में मुनगा (सहजन) पेड़ को लेकर बीते दो वर्षों से गंभीर विवाद चल रहा है। गांव के लगभग 14 परिवार इन पेड़ों के कारण सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहे हैं। इस अजीबोगरीब विवाद ने गांव में सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया है।

मुनगा पेड़ के सहारे अतिक्रमण का आरोप

भोथीपार गांव में कई जगहों पर मुनगा के पेड़ लगे हैं — कुछ घरों के भीतर, तो कुछ बाहर गलियों में। विवाद की शुरुआत तब हुई जब ग्राम विकास समिति ने आरोप लगाया कि इन 14 परिवारों ने मुनगा पेड़ के बहाने सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण किया है। वहीं, बहिष्कृत परिवारों का कहना है कि ये आरोप निराधार हैं और समिति उनकी सामाजिक रूप से प्रताड़ना कर रही है।

दो साल से चल रहा बहिष्कार, जिंदगी बनी मुश्किल

ग्राम विकास समिति द्वारा इन परिवारों का सामूहिक बहिष्कार कर दिया गया है। गांव के लोग न उनसे बात करते हैं, न कोई सामाजिक या आर्थिक लेन-देन करते हैं। इन परिवारों को मजदूरी नहीं मिलती और खेती के काम के लिए ट्रैक्टर भी उन्हें अन्य गांवों से मंगवाना पड़ता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर वर्ग को सामाजिक तिरस्कार का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन और पुलिस के सामने भी नहीं सुलझा मामला

पीड़ितों ने कई बार जिला प्रशासन और पुलिस से शिकायत की, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। विवाद लगातार गहराता जा रहा है, जिससे गांव में सामाजिक तनाव भी बना हुआ है।

क्या सिर्फ एक पेड़ बना है समस्या की जड़?

इस पूरे प्रकरण ने ग्रामीण सामाजिक ढांचे और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सच में यह सिर्फ मुनगा पेड़ का विवाद है, या फिर इसके पीछे गहरी सामाजिक खाई है — यह प्रशासनिक जांच का विषय है।

फिलहाल बहिष्कृत परिवार प्रशासन से न्याय की आस लगाए बैठे हैं, और गांव में सौहार्द बहाल करना अब एक बड़ी चुनौती बन चुका है।

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