बिलासपुर । आपातकाल की 50वीं बरसी पर भाजपा कार्यालय बिलासपुर में एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस जिला स्तरीय संगोष्ठी में पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र गर्ग, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता महेंद्र धर्माणी, भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णलाल चंदेल, मीडिया सह प्रभारी स्वदेश ठाकुर सहित पार्टी के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
संगोष्ठी के पश्चात पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए संदीपनी भारद्वाज द्वारा पौधरोपण भी किया गया।
“आपातकाल लोकतंत्र की हत्या थी” – संदीपनी भारद्वाज
भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में संदीपनी भारद्वाज ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय बताते हुए कहा,
“25 जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ‘आंतरिक शांति’ के नाम पर आपातकाल लागू किया, जबकि न कोई युद्ध था, न ही कोई सशस्त्र विद्रोह। यह सिर्फ अपने पद को बचाने और अदालत के निर्णय से बचने का तरीका था। अनुच्छेद 352 का स्पष्ट दुरुपयोग कर लोकतंत्र के चारों स्तंभों – कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका और प्रेस – को बंधक बना दिया गया।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन के उस काले दौर की सच्चाई को देश की नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि उन्हें लोकतंत्र की कीमत और उसके महत्व का अहसास हो।
“कांग्रेस को संविधान की दुहाई देने का अधिकार नहीं”
संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा,
“आज राहुल गांधी हाथ में संविधान की प्रति लेकर संविधान की हत्या की बात करते हैं, लेकिन वह यह भूल जाते हैं कि उनकी दादी इंदिरा गांधी ने 50 वर्ष पूर्व वास्तव में संविधान को कुचलते हुए देश पर आपातकाल थोपा था। लाखों नागरिकों की स्वतंत्रता छीनी गई, सेंसरशिप थोप दी गई, और असहमति की हर आवाज को बंद कर दिया गया था।”
“मोदी सरकार में लोकतंत्र मजबूत, अर्थव्यवस्था मजबूत”
उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने लोकतंत्र को और सशक्त किया है और देश की अर्थव्यवस्था को 11वें स्थान से उठाकर चौथे स्थान तक पहुंचाया है।
“विकास, सुशासन और भ्रष्टाचारमुक्त भारत की दिशा में जो कार्य वर्तमान केंद्र सरकार कर रही है, उससे जनता संतुष्ट है। कांग्रेस केवल भ्रम फैलाने की राजनीति कर रही है, लेकिन देश की जनता अब समझ चुकी है कि किसने संविधान की हत्या की और कौन उसे मजबूत कर रहा है।”
कार्यक्रम का उद्देश्य
संगोष्ठी का उद्देश्य था कि 1975 के आपातकाल और उस दौरान हुए लोकतंत्र के दमन के विषय में युवाओं को जानकारी दी जाए, ताकि वे वर्तमान और अतीत के बीच का फर्क समझ सकें और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा कर सकें।








