उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली और हर्षिल घाटी में आई भीषण आपदा के बीच राहत वितरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आपदा पीड़ित ग्रामीणों ने सरकार द्वारा दी जा रही 5,000 रुपये की फौरी राहत राशि के चेक लेने से इनकार करते हुए धामी सरकार के खिलाफ नाराज़गी जताई।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने स्पष्ट किया कि यह राशि केवल तत्काल राहत के रूप में दी जा रही है। उन्होंने कहा कि नुकसान का पूरा आकलन और विस्तृत रिपोर्ट तैयार होने के बाद प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।
इस बीच, लगातार बारिश के कारण क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। गंगोत्री हाईवे पर मनेरी बांध से पानी छोड़ा जा रहा है ताकि बांध पर कोई दबाव न पड़े। अब तक 700 से अधिक लोगों को (स्थानीय निवासी और तीर्थयात्री) सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि 250 लोगों को अभी रेस्क्यू किया जाना बाकी है। अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है—राज्य सरकार के अनुसार 3 और सेना के अनुसार 2।
लापता लोगों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। सेना का कहना है कि 100 लोग लापता हैं, जबकि राज्य सरकार 16 और जिला प्रशासन 50 लोगों के लापता होने की बात कह रहा है। इनमें 8 सेना के जवान भी शामिल हैं।
धराली में नेटवर्क और बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। चिनूक हेलिकॉप्टर से जनरेटर और जरूरी उपकरण भेजे गए हैं। नेटवर्क बहाल होने के बाद कई लापता लोगों से संपर्क संभव हुआ, जिससे लापता संख्या में कमी आई है।
राहत कार्यों में सेना और वायुसेना के जवान दिन-रात जुटे हैं। लिमचिगाड़ में बैली ब्रिज बनाने का काम रातभर जारी रहा। जॉली ग्रांट से एक चिनूक हेलिकॉप्टर जनरेटर सेट लेकर रवाना हुआ, जबकि दूसरा धरासू से हर्षिल पहुंचा। इसके अलावा तीन चीता हेलिकॉप्टर भी रेस्क्यू और लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए तैनात किए गए हैं।









