रक्षाबंधन पर भी कायम अनोखी परंपरा: बलौदाबाजार के नारायणपुर शिव मंदिर में भाई-बहन का साथ में दर्शन वर्जित

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रक्षाबंधन का त्योहार पूरे देश में भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक बनकर धूमधाम से मनाया जा रहा है। लेकिन छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जहां भाई-बहन का साथ में भगवान के दर्शन करना आज भी वर्जित है।

कसडोल विकासखंड से लगभग 8 किलोमीटर दूर नारायणपुर गांव स्थित नारायणपुर शिव मंदिर न सिर्फ अपनी कलात्मक नक्काशी और भव्य वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि सदियों पुरानी इस अनोखी मान्यता के लिए भी जाना जाता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, अगर भाई-बहन एक साथ इस मंदिर में प्रवेश कर दर्शन करते हैं, तो उनके रिश्ते में दरार या जीवन में अशुभ घटनाएं घट सकती हैं।

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे भगवान शिव का आदेश माना जाता है। एक प्रचलित कथा के अनुसार, सैकड़ों साल पहले एक भाई-बहन ने साथ में दर्शन किए थे, जिसके बाद उनके जीवन में विपत्तियां आ गईं—बहन की शादी टूट गई और भाई गंभीर बीमारी से जूझने लगा। तभी से यह परंपरा कड़ी आस्था के साथ निभाई जा रही है।

कुछ मान्यताएं मंदिर की दीवारों पर बनी मिथुन मूर्तियों से भी जुड़ी हैं। प्राचीन समय में इन्हें मर्यादा और शील का प्रतीक मानते हुए भाई-बहनों के संयुक्त प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी।

इतिहासकारों का मानना है कि 11वीं-12वीं शताब्दी में कलचुरी राजवंश द्वारा बनवाया गया यह पंचरथ शैली का मंदिर कला और शिल्प का अद्भुत उदाहरण है। इसकी दीवारों पर देवी-देवताओं, अप्सराओं, पशु-पक्षियों और पौराणिक कथाओं की बारीक नक्काशी आज भी जीवंत प्रतीत होती है।

आज भी यह मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। रक्षाबंधन जैसे पर्व पर भी यहां की परंपरा उतनी ही दृढ़ता से निभाई जाती है। यदि आप बलौदाबाजार आएं, तो इस प्राचीन धरोहर के दर्शन जरूर करें—बस अगर आप भाई-बहन हैं, तो इस आस्था और परंपरा का सम्मान करना न भूलें।

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