विधायक देवेंद्र यादव की रिहाई के बाद बढ़ेगी सियासी भूमिका? राहुल गांधी से मुलाकात के बाद चर्चाएं तेज

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दिल्ली से लेकर छत्तीसगढ़ तक सियासी हलचल तेज, बीजेपी ने कसा तंज

भिलाई। कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के जेल से रिहा होने के बाद उनकी सियासी भूमिका को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। जेल से बाहर आते ही उन्हें दिल्ली से बुलावा आया और उन्होंने राहुल गांधी से 40 मिनट लंबी मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है।

देवेंद्र यादव को मिलेगी नई जिम्मेदारी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस हाईकमान देवेंद्र यादव को महत्वपूर्ण भूमिका दे सकता है। हालांकि, इस पर प्रतिक्रिया देते हुए देवेंद्र यादव ने कहा, “मुझे पार्टी ने पहले से ही जिम्मेदारी दी हुई है। जब मैं जेल में था, तब भी मुझे बिहार का प्रभारी बनाया गया था। आगामी छह महीनों में बिहार में चुनाव हैं, और मैं अपनी जिम्मेदारी निभा रहा हूं।”

बीजेपी का तंज – ‘कांग्रेस शून्यता की ओर’

देवेंद्र यादव की रिहाई के बाद बढ़ती चर्चाओं पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस में बदलाव की चर्चा लंबे समय से चल रही है, लेकिन उसका कोई असर नहीं दिख रहा। विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही यह चर्चा चल रही है, लेकिन हकीकत यह है कि कांग्रेस शून्यता की ओर बढ़ रही है।”

जेल से रिहाई के बाद फिर FIR

देवेंद्र यादव को करीब सात महीने बाद जमानत मिली। उनकी रिहाई का उनके समर्थकों ने जश्न मनाया, जिसके कारण भिलाई में ट्रैफिक जाम हो गया। इस मामले में गंज पुलिस ने देवेंद्र यादव, सुबोध हरितवाल, आकाश शर्मा समेत 13 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है।

क्या था मामला, क्यों भेजे गए थे जेल?

10 जून 2024 को बलौदाबाजार में सतनामी समाज ने जैतखाम तोड़े जाने के विरोध में प्रदर्शन किया था, जो हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर और एसपी कार्यालय में आग लगा दी। इस मामले में देवेंद्र यादव पर भीड़ को भड़काने और हिंसा में भूमिका निभाने का आरोप लगाकर केस दर्ज किया गया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय की उस याचिका पर रोक लगा दी है, जिसमें देवेंद्र यादव की विधायकी रद्द करने की मांग की गई थी। इस मामले की सुनवाई अब अप्रैल में होगी।

देवेंद्र यादव की सफाई

सुप्रीम कोर्ट में देवेंद्र यादव की ओर से उनके वकील ने दलील दी कि हिंसा के समय वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने केवल सभा में भाग लिया था, लेकिन मंच से कोई भाषण नहीं दिया। उनकी गिरफ्तारी भिलाई स्थित घर से हुई थी, जो घटनास्थल से कई किलोमीटर दूर था। वकील ने दलील दी कि पुलिस की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित थी।

रिहाई के बाद देवेंद्र यादव का बयान

जेल से रिहाई के बाद देवेंद्र यादव ने कहा, “जहां मेरी जरूरत होगी, मैं वहां जाऊंगा। बिना डरे, बेझिझक जनता के लिए काम करूंगा।” उन्होंने बलौदा बाजार हिंसा मामले की CBI जांच की मांग भी की है।

राजनीतिक करियर और राहुल गांधी से करीबी

देवेंद्र यादव ने छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत की थी। एनएसयूआई से जुड़े रहने के बाद, वह युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भी रहे। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी वह राहुल गांधी के काफ़ी करीबी नजर आए।

अब देखना यह होगा कि कांग्रेस उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपती है या नहीं, लेकिन उनकी राहुल गांधी से मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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