नई दिल्ली। अमेरिका और भारत के रिश्तों में गहराता तनाव अब नई कड़ी में प्रवेश करता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला प्रशासन भारत पर लगातार दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है, जबकि भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर है अपनी ताकत को वैश्विक मंच पर साबित करने का।
25 वर्षों की रणनीतिक निकटता पर संकट
पिछले ढाई दशकों में भारत और अमेरिका ने व्यापार, सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की थी। लेकिन हाल ही में ट्रंप प्रशासन के कड़े रुख और मंत्रियों के बयानों ने इन संबंधों पर पानी फेरने जैसा असर डाला है।
गुरुवार को अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने यूरोपीय देशों से अपील की कि वे भी भारत पर टैरिफ बढ़ाएं और मिलकर नई दिल्ली पर दबाव बनाएं। उन्होंने सवाल किया— “हमें यूरोपीय साझेदारों से ज्यादा सहयोग चाहिए। वे भारत को धमकी क्यों नहीं दे रहे?”
बेसेंट ने संकेत दिए कि यदि भारत झुकेगा नहीं तो राष्ट्रपति ट्रंप किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं होंगे। इसी के साथ वीजा पाबंदियों को और कड़ा कर दिया गया है, जिससे भारतीय नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। अमेरिका का आरोप है कि भारत वीजा के दुरुपयोग का सबसे बड़ा स्रोत है।
भारत के साथ पश्चिमी देशों का समर्थन
ट्रंप प्रशासन की इस नीति की आलोचना अब अमेरिका के भीतर से भी हो रही है। पूर्व अमेरिकी राजनयिक एवन फाइगेनबॉम ने कहा, “रूस-यूक्रेन युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’ बताना हास्यास्पद है। यह महज 25 साल की मेहनत से बने अमेरिका-भारत संबंधों को बर्बाद करने जैसा है।”
ब्रिटिश पत्रिका इकॉनॉमिस्ट ने भी टिप्पणी की है कि पाकिस्तान की ओर झुकाव और भारत से दूरी बनाना अमेरिका की खुद की हार है। पत्रिका के अनुसार, “भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर विशेष दंड लगाना दोहरे मापदंड का उदाहरण है। अमेरिका का भारत से दूर होना एक गंभीर भूल है, जबकि भारत के लिए यह अपने ‘महाशक्ति बनने के दावे’ को साबित करने का मौका है।”
विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका भारत को अलग-थलग करेगा तो भारत अपने निर्यात को अमेरिका से हटाकर ब्रिक्स देशों की ओर मोड़ सकता है। उनके अनुसार, “यह कदम ब्रिक्स को और मजबूत बनाएगा और पश्चिम की कमजोरी उजागर करेगा।”
भारत के लिए अवसर
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा स्थिति भारत के लिए एक बड़े अवसर में बदल सकती है। अमेरिका के दबाव और आलोचना के बीच भारत नए बाजारों तक अपनी पहुंच बना सकता है और घरेलू सुधारों के जरिए अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है।
चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति, यूरोप और एशिया में नए सहयोगी, और ब्रिक्स देशों के साथ गहराती साझेदारी भारत को उस दिशा में ले जा सकती है जहां से वह ‘महाशक्ति बनने के अपने दावे’ को मजबूती से स्थापित कर सके।









