“संविधान हर नागरिक का अधिकार, केवल अमीरों का विशेषाधिकार नहीं” — सीजेआई सूर्यकांत न्याय व्यवस्था को आम लोगों तक पहुंचाने और गरीब एवं समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े नागरिकों के संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करने पर जोर
नई दिल्ली: 21/05/2026 देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने संविधान को भारत के हर नागरिक का साझा अधिकार बताते हुए कहा कि यह केवल उन लोगों तक सीमित नहीं रह सकता जो महंगे वकील और लंबी कानूनी प्रक्रियाओं का खर्च उठा सकते हैं।
सीजेआई ने ये महत्वपूर्ण बातें वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह की आत्मकथा “The Constitution Is My Home: Conversations on a Life in Law” के विमोचन समारोह के अवसर पर अपने वीडियो संदेश में कहीं। ब्रिक्स देशों के न्यायाधीशों की बैठक में व्यस्तता के कारण वे कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने वीडियो क्लिप के माध्यम से अपनी शुभकामनाएं और विचार साझा किए।
अपने संबोधन में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि संविधान केवल न्यायाधीशों, वकीलों या सरकारी अधिकारियों की संपत्ति नहीं है, बल्कि यह गांवों, शहरों, गरीबों और समाज के हाशिए पर खड़े हर उस नागरिक का है जो न्याय और समान अधिकारों में विश्वास रखता है।
उन्होंने कहा कि देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए कानून बनाने की नहीं, बल्कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और उनकी वास्तविक जिंदगी के बीच मौजूद दूरी को कम करने की है।
सीजेआई के इस बयान को न्याय तक समान पहुंच, संवैधानिक मूल्यों की मजबूती और आम नागरिकों के अधिकारों को लेकर एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।










