केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज लिए गए अहम फैसलों के जरिए भारत के तकनीकी और अवसंरचनात्मक भविष्य की नई रूपरेखा तय कर दी। सबसे उल्लेखनीय निर्णय 7,280 करोड़ रुपये की Rare Earth Permanent Magnets (REPM) Scheme को मंजूरी का है। इस योजना के तहत देश में पहली बार 6,000 MTPA क्षमता वाले एकीकृत रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन संयंत्र स्थापित किए जाएंगे—एक ऐसा कदम जो भारत की तकनीकी संप्रभुता को नई ऊँचाई देगा।
रेयर अर्थ मैग्नेट बैटरी, इलेक्ट्रिक मोटर, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, रडार, विन्ड टर्बाइन जैसे आधुनिक उपकरणों और उभरती प्रौद्योगिकियों का केंद्रीय घटक हैं। अब तक भारत इनकी भारी मात्रा में आयात पर निर्भर रहा है, जबकि विश्व बाजार में चीन का प्रभुत्व 90% से अधिक है। ऐसे में यह योजना न केवल आयात-निर्भरता कम करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी।
रेलवे क्षेत्र को दो बड़ी परियोजनाओं की सौगात
मंत्रिमंडल ने रेलवे नेटवर्क को सुदृढ़ करने के लिए महाराष्ट्र और गुजरात में 224 किमी लंबाई की दो मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी। इन परियोजनाओं से माल परिवहन और यात्री यातायात दोनों को गति मिलेगी। यह पश्चिमी भारत के औद्योगिक और वाणिज्यिक गलियारों को और अधिक कुशल बनाने की दिशा में अहम कदम है।
पुणे मेट्रो फेज-2 को हरी झंडी
तेजी से बढ़ते पुणे महानगर की भविष्यगत परिवहन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पुणे मेट्रो फेज-2 की लाइन 4 और 4A (31.6 किमी) के लिए 9,857 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई है। यह मेट्रो विस्तार हरित, टिकाऊ और बहु-माध्यमीय शहरी परिवहन नेटवर्क को मजबूत करेगा।
भारत के उदित होते तकनीकी और लॉजिस्टिक महाशक्ति बनने के संकेत
आज के फैसले केवल प्रशासनिक स्वीकृतियाँ नहीं, बल्कि भारत की 21वीं सदी की रणनीतिक दिशा को चिन्हित करने वाले महत्वपूर्ण मील के पत्थर हैं। रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण, रेलवे नेटवर्क विस्तार और मेट्रो प्रणाली का प्रसार—ये तीनों निर्णय मिलकर यह संदेश देते हैं कि भारत अब केवल उपभोक्ता अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक उत्पादन, तकनीक और लॉजिस्टिक्स का उभरता हुआ केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है।









