पाली/कोरबा। मितानिन कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर पाली विकासखंड चर्चा में है। इस बार ब्लॉक समन्वयक राधेश्याम खांडे ने समीक्षा बैठक के दौरान जातिगत अपमान और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने जिला कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
शिकायतकर्ता राधेश्याम खांडे, जो वर्तमान में मितानिन कार्यक्रम में स्वस्थ पंचायत पद पर कार्यरत हैं, ने आरोप लगाया है कि वह अनुसूचित जाति (सतनामी वर्ग) से होने के कारण लगातार भेदभाव और अपमान का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 25 जुलाई को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली में आयोजित एम.टी. समीक्षा बैठक में शामिल होने वे पहुंचे थे, लेकिन बैठक में मौजूद ब्लॉक समन्वयक विजय कश्यप, शिव नारायण राठौर, और एमटी प्रेमलता पंथ, उमा यादव तथा गायत्री विश्वकर्मा ने उनसे अभद्र व्यवहार करते हुए कहा कि “यह संघ की बैठक है, तुम बाहर चलो। तुम सतनामी जाति के हो, तुम्हारा यहां क्या काम?” इसके बाद उन्हें बैठक कक्ष से बाहर निकाल दिया गया।
खांडे ने अपनी शिकायत में कहा है कि यह केवल एक बार की घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय से उन्हें जातिगत भेदभाव का शिकार बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मितानिन कार्यक्रम में भ्रष्टाचार और जबरन वसूली जैसे अवैध गतिविधियों में शामिल न होने तथा विरोध करने की वजह से उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है।
कुछ समय पहले भी हरदीबाजार क्षेत्र की एक मितानिन, अनुसूईया राठौर ने ब्लॉक समन्वयक विजय कश्यप, सुनीता कंवर और एमटी विमला कलिहारे पर सेवा में पुनः नियुक्ति के लिए रिश्वत मांगने और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था।
राधेश्याम खांडे ने अंत में कहा कि अब स्थिति असहनीय हो चुकी है, इसलिए उन्होंने कलेक्टर से न्याय की मांग की है। उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करेगा और उन्हें न्याय मिलेगा।








