कोर्ट के फैसले के बाद कुर्मी समाज का रुख सख्त, विवादित जमीन पर बढ़ा टकराव

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अदालती जीत के बाद समाज हुआ मुखर, जमीन को लेकर गंभीर आरोपों से गरमाया माहौल, प्रशासन पर भी उठे

 

कोरबा/बिलासपुर, 27 अप्रैल 2026।

 

कई वर्षों से न्यायालयों में लंबित विवादित भूमि का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। राजस्व न्यायालय (09 फरवरी 2026) और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (20 अप्रैल 2026) से कुर्मी क्षत्रिय समाज के पक्ष में फैसले आने के बाद समाज ने आक्रामक रुख अपना लिया है और जमीन पर चल रही गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

कुर्मी क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष आर.के. वर्मा ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बाद विवादित भूमि को अविलंब खाली कराकर समाज को सौंपा जाए।

स्कूल संचालन पर उठे सवाल

समाज का आरोप है कि विवादित भूमि पर “बिलियन पब्लिक स्कूल” का संचालन किया जा रहा है, जिसकी वैधानिक अनुमति को लेकर संदेह जताया गया है। समाज ने मांग की है कि यह जांच का विषय है कि आखिर किस आधार पर वर्षों से स्कूल संचालित हो रहा है।

परिसर में खड़े भारी वाहन

समाज के अनुसार, स्कूल से संबंधित बसें और अन्य भारी वाहन दिन-रात परिसर में खड़े रहते हैं, जिससे सुरक्षा मानकों और नियमों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं।

अवैध निर्माण का आरोप

समाज ने आरोप लगाया है कि बिना वैधानिक स्वीकृति के एक बड़ा भवन खड़ा किया गया है। निर्माण के दौरान प्रशासन की भूमिका और निगरानी पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

बिना अनुमति बनाया गया प्रवेश मार्ग

यह भी आरोप है कि परिसर में वाहनों की आवाजाही के लिए एक बड़ा गेट तोड़कर नया रास्ता तैयार किया गया, जो नियमों का उल्लंघन है।

धार्मिक भावनाओं को ठेस का आरोप

समाज ने दावा किया है कि परिसर में स्थापित बजरंग बली की मूर्ति को क्षति पहुंचाई गई और सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा को भी नुकसान हुआ, जिससे समाज में आक्रोश व्याप्त है।

1985 से समाज का जुड़ाव

समाज का कहना है कि वर्ष 1985 से यह भूमि उनके सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का केंद्र रही है। यहां नियमित रूप से

• सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती

• डॉ. खूबचंद बघेल जयंती

• छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती

जैसे आयोजन होते रहे हैं।

समाज की मुख्य मांग

कुर्मी क्षत्रिय कल्याण समिति ने प्रशासन से मांग की है कि विवादित भूमि को तत्काल खाली कराया जाए और उसे “सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति संस्थान” संचालित समिति को सौंपा जाए।

प्रशासनिक कार्रवाई पर निगाहें

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।

लंबे कानूनी संघर्ष के बाद मिली जीत ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब यह केवल न्यायालय का फैसला नहीं, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही और निष्पक्ष कार्रवाई की बड़ी परीक्षा बन गया है।

 

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