बड़े झाड़ की शासकीय भूमि पर फर्जीवाड़े का आरोप — राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर करोड़ों का ग्रीन चुल बायो प्लांट निर्माण जारी

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कोरबा/पाली। सीमावर्ती ग्राम शिवपुर (विकासखंड पाली) में शासकीय भूमि पर कथित राजस्व कूटरचना और हेराफेरी कर निजी कंपनी को करोड़ों का लाभ पहुंचाने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि बड़े झाड़ श्रेणी की सरकारी भूमि पर ग्रीन चुल बायो प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, जबकि यह भूमि वर्षों पूर्व ग्रामीणों को वन अधिकार पट्टा के तहत दी गई थी।

करीब 10 एकड़ (रकबा नंबर 541) भूमि पर तीन माह से तेजी से निर्माण कार्य जारी है। बताया गया कि इस भूमि के कुछ हिस्से पर वर्ष 1975 में स्थानीय ग्रामीण मनहरण पिता मुनीराम और अन्य को कृषि कार्य हेतु पट्टा दिया गया था। वर्ष 2000 में वन विभाग द्वारा इसी भूमि पर पौधारोपण भी किया गया था।

✍️ फर्जीवाड़े का आरोप

सूत्रों के अनुसार, ग्रीन चुल बायो प्लांट को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर बड़े झाड़ की भूमि को निजी बताने की कोशिश की गई। कथित रूप से फर्जी किसान किताब, दस्तावेज और चौहद्दी तैयार कर भूमि को निजी स्वामित्व की तरह प्रस्तुत किया गया।

गौरतलब है कि पट्टा प्राप्त किसान मुनीराम ने कुछ वर्ष पूर्व उक्त भूमि को रतनपुर निवासी एक व्यक्ति को बेचा था, परंतु यह रजिस्ट्री एसडीएम कार्यालय पाली द्वारा निरस्त कर दी गई, क्योंकि यह शासकीय भूमि थी। मामला वर्तमान में राजस्व न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद इसी भूमि पर अब प्लांट का निर्माण जारी है।

🌳 पेड़ों की कटाई और ग्राम पंचायत की भूमिका पर सवाल

स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण शुरू होने के शुरुआती दिनों में साजा और सराई जैसे सैकड़ों बड़े पेड़ रातों-रात काटे गए। ग्राम सरपंच द्वारा 6 एकड़ भूमि का एनओसी भी जारी कर दिया गया, जिसकी जानकारी न तो पंचों को थी और न ही संबंधित विभागों को।

ग्रामीणों का कहना है कि इस अवैध निर्माण से आसपास की 40 एकड़ कृषि भूमि और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

⚖️ कानूनी पहलू और जांच की मांग

विशेषज्ञों के अनुसार, वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धारा 2 के तहत बड़े झाड़ श्रेणी की भूमि का उपयोग या हस्तांतरण केंद्र सरकार की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। उच्चतम न्यायालय ने भी इस संबंध में कई याचिकाओं को निरस्त किया है।

इसके बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव और निजी निर्माण कार्य यह दर्शाता है कि राजस्व अमले की भूमिका संदिग्ध है। यह मामला शासन-प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि शासकीय भूमि पर हो रहे निर्माण कार्य, राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी और अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

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