Bastar Naxal Cleanup: बस्तर में नक्सलियों का किला ध्वस्त, 2 साल में करीब 500 माओवादी ढेर – सरेंडर की आखिरी खिड़की भी बंद

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सरकार मार्च 2026 तक बस्तर से नक्सलवाद खत्म करने के लक्ष्य पर तेजी से बढ़ रही है।

  • दो साल में 494 नक्सली मारे गए, 453 शव बरामद
  • हिड़मा सहित कई बड़े माओवादी नेताओं के खात्मे के बाद सरेंडर की प्रक्रिया तेज।
  • 2 दिसंबर तक सुरक्षित कॉरिडोर बनाया गया, पर नक्सली नहीं पहुंचे।
  • बीजापुर नेशनल पार्क इलाके में हालिया मुठभेड़ में 18 नक्सली ढेर, 3 जवान शहीद।
  • गोगुड़ा और कर्रेगुट्टा जैसी ऊंची पहाड़ियों पर सुरक्षा बलों ने कब्जा कर अंतिम सुरक्षित ठिकाने तोड़े।

Bastar Naxal Cleanup अभियान ने वर्ष 2025 में नक्सलियों की कमर लगभग तोड़ दी है। पहली बार ऐसा माहौल बना है कि बस्तर से नक्सलवाद तय समय से पहले पूरी तरह खत्म हो सकता है। सरकार नक्सलियों को बिना गोलीबारी सरेंडर कराने के लिए लगातार अवसर दे रही है, लेकिन हाल ही में बनाए गए सेफ कॉरिडोर का फायदा माओवादी नहीं उठा सके।


आरोप/जांच व मुठभेड़ का विवरण:

सरकार ने बस्तर से नक्सलियों का पूर्ण सफाया करने का लक्ष्य तय किया है। वर्ष 2025 में यह सबसे निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जहां नक्सली ढेर होने और सरेंडर की संख्या इतिहास में सबसे अधिक दर्ज हुई।

2 दिसंबर की रात तक नक्सलियों को सरेंडर के लिए विशेष सेफ कॉरिडोर प्रदान किया गया था। सुरक्षा बलों ने कई दिनों तक अभियान रोककर माओवादियों के आत्मसमर्पण का इंतजार किया। नक्सली नहीं पहुंचे, जिसके बाद ऑपरेशन दोबारा शुरू हुआ।

बीजापुर के नेशनल पार्क क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने बुधवार को मुठभेड़ में 18 नक्सलियों को ढेर किया। पहले 12 के मारे जाने की सूचना थी, बाद में सर्च ऑपरेशन में और शव मिले। इस कार्रवाई में कुल 3 जवान शहीद हुए।


प्रभाव (Effect):

  • वर्ष 2025 में 255 नक्सली मारे गए, 236 शव बरामद हुए।
  • वर्ष 2024 में 239 नक्सली मारे गए, 217 शव मिले।
  • साय सरकार के दो साल के कार्यकाल में कुल 494 माओवादी ढेर, 453 शव बरामद हुए।

गंगालूर–जांगला–भैरमगढ़ बेल्ट, जिसे माओवाद की फैक्ट्री माना जाता था, वहां नक्सलियों की रीढ़ लगभग टूट चुकी है। हालिया मुठभेड़ में मारे गए वेल्ला मोडियम पर कुल 1.30 करोड़ का इनाम था और वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी की रणनीति का प्रमुख हिस्सा माना जाता था।


प्रशासन की कार्रवाई:

सुरक्षा बल नक्सलियों के सबसे कठिन पहाड़ी ठिकानों पर कब्जा कर रहे हैं।

  • गोगुड़ा की 669 मीटर ऊंची पहाड़ी पर सेना ने कैंप स्थापित किया।
  • इससे पहले कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर भी कब्जा कर वहां कैंप खोला गया।

गृहमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया है कि सरकार गोलीबारी नहीं चाहती। माओवादी हिंसा छोड़कर पुनर्वास चुनें, इसके लिए “लाल कालीन” बिछाने को तैयार हैं। लेकिन हथियार नहीं छोड़ने वालों का हाल वही होगा जो पिछले दो वर्षों में लगभग 500 माओवादियों का हुआ है।

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