पाकिस्तान की हिरासत में करीब तीन हफ्ते बिताने के बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान पूर्णम कुमार शॉ को आज सुबह सकुशल भारत वापस सौंप दिया गया। 23 अप्रैल 2025 को गलती से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तानी क्षेत्र में चले जाने के बाद पाकिस्तान रेंजर्स ने उन्हें हिरासत में लिया था। आज सुबह करीब 10:30 बजे उन्हें अटारी-वाघा सीमा स्थित संयुक्त चेक पोस्ट पर भारत को सौंपा गया।
बीएसएफ पंजाब फ्रंटियर द्वारा जारी बयान में कहा गया कि यह प्रत्यर्पण शांतिपूर्ण माहौल में और तय प्रोटोकॉल के तहत संपन्न हुआ। हैंडओवर के समय जवान का परिवार भी मौके पर मौजूद था। जवान की पत्नी रजनी शॉ, जो गर्भवती हैं, ने पति की रिहाई के लिए हर स्तर पर प्रयास किए और लगातार अधिकारियों से संपर्क में रहीं। उन्होंने फिरोजपुर में बीएसएफ के कमांडिंग ऑफिसर से भी मुलाकात की थी।
भारत सरकार ने घटना के बाद त्वरित डिप्लोमैटिक कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान से उच्च स्तरीय संवाद शुरू किया और जवान की सुरक्षित रिहाई की मांग की। सरकार के दबाव और निरंतर संवाद के चलते पाकिस्तान को जवान को रिहा करना पड़ा।
इस मामले ने राजनीतिक स्तर पर भी ध्यान खींचा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 5 मई को अपनी चिंता जताई थी और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने जवान के परिवार से संपर्क बनाए रखा।
बीएसएफ ने इस घटना के मद्देनज़र अपने जवानों को सीमा पर गश्त करते समय अत्यधिक सतर्क रहने के निर्देश जारी किए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पूर्णम कुमार शॉ की सुरक्षित वापसी ने उनके परिवार के साथ पूरे देश को राहत की सांस दी है।










