कोरबा/पाली। विशेष रिपोर्ट।
पाली। विश्व मूलनिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को पाली में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और एकजुटता का भव्य नजारा देखने को मिला। ढोल-मांदल की थाप, पारंपरिक वेशभूषा और लोकनृत्यों के बीच हजारों आदिवासी भाई-बहनों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ जल, जंगल, जमीन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का संदेश दिया। पूरे कार्यक्रम में “सेवा जोहार” का नारा गूंजता रहा।
कार्यक्रम का नेतृत्व क्षेत्रीय विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने किया। उनके सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम में आदिवासी समाज को अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने के साथ ही संविधान प्रदत्त अधिकारों के प्रति जागरूक, शिक्षित और संगठित रहने का संदेश दिया गया।
“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”
सभा को संबोधित करते हुए विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने कहा कि 9 अगस्त केवल एक तारीख नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के संघर्ष, बलिदान और अधिकारों की पहचान का महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने बिरसा मुंडा, टंट्या भील और मानगढ़ के शहीदों के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए समाज को हमेशा सजग और एकजुट रहना होगा।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को पेसा कानून, वन अधिकार अधिनियम और पांचवीं अनुसूची जैसे संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी हासिल कर उनका लाभ लेना चाहिए। अधिकारों की जानकारी ही समाज को सशक्त बनाने का सबसे बड़ा माध्यम है।
विधायक मरकाम ने युवाओं से नशे से दूर रहकर शिक्षा, खेल और रचनात्मक गतिविधियों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “समाज को आगे बढ़ाना है तो बेटियों को शिक्षित और सशक्त बनाना होगा।”

ढोल-मांदल की थाप पर झूम उठा पाली
कार्यक्रम स्थल पर सुबह से ही आदिवासी समाज के लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। विभिन्न सामाजिक संगठनों और समुदायों के लोग बैनर-पोस्टर के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं और युवाओं ने अपनी संस्कृति की आकर्षक झलक प्रस्तुत की।
शोभायात्रा में महिलाओं के सिर पर सजी मटकियां और युवाओं के हाथों में पारंपरिक तीर-कमान आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे। वहीं मंच पर प्रस्तुत घूमर, गवरी और सुआ नृत्य ने पूरे माहौल को उत्साह और उमंग से भर दिया। लोकगीतों और ढोल-मांदल की गूंज के बीच पूरा पाली क्षेत्र आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।
नई पीढ़ी को संस्कृति और अधिकारों से जोड़ने का संदेश
आयोजकों ने बताया कि विश्व मूलनिवासी दिवस समारोह का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ना है। कार्यक्रम के दौरान समाज के लोगों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा एकजुट रहने का संकल्प लिया।
समापन अवसर पर उपस्थित लोगों ने एक स्वर में जल-जंगल-जमीन, भाषा, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूक एवं संगठित रहने का संकल्प दोहराया।









