छत्तीसगढ़ में बेनामी संपत्ति लेनदेन के मामलों में तेजी से बढ़ रही शिकायतों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के ऐसे सभी मामलों की सुनवाई रायपुर स्थित 12वें अपर सत्र न्यायाधीश (XII ASJ) की अदालत में की जाएगी, जिसे विशेष अदालत के रूप में अधिसूचित किया गया है।
गजट में अधिसूचना प्रकाशित, हाईकोर्ट का नोटिफिकेशन जारी
केंद्र सरकार ने 17 जुलाई 2025 को भारत के राजपत्र में इस विशेष अदालत के गठन की अधिसूचना जारी की है। बिलासपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से यह फैसला लिया गया है। पहले यह जिम्मेदारी रायपुर के VII ASJ को दी गई थी, जिसे अब स्थानांतरित कर दिया गया है। इस बदलाव की पुष्टि न्याय विभाग, नई दिल्ली द्वारा जारी अधिसूचना S.O. 3268(E) के आधार पर की गई है।
क्या होता है बेनामी लेनदेन?
बेनामी लेनदेन वह होता है जिसमें किसी संपत्ति की खरीद के लिए धन कोई और देता है, लेकिन संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति या काल्पनिक नाम पर रजिस्टर्ड होती है। यह लेनदेन आमतौर पर काले धन को छिपाने, कर चोरी या कर्ज व कानूनी दायित्वों से बचने के इरादे से किया जाता है।
कानूनी प्रावधान और सजा
बेनामी लेनदेन प्रतिषेध अधिनियम, 1988 (संशोधित 2016) के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को:
1 से 7 साल तक की कैद,
संपत्ति के बाजार मूल्य के 25% तक जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
तेज़ और पारदर्शी कार्रवाई की दिशा में बड़ा कदम
राज्य में बेनामी संपत्तियों से जुड़े बढ़ते मामलों और लंबी कानूनी प्रक्रिया को देखते हुए यह विशेष न्यायालय स्थापित किया गया है। इससे अब छत्तीसगढ़ के सभी बेनामी मामलों की सुनवाई एक ही अदालत में होगी, जिससे न्याय प्रक्रिया तेज़ और केंद्रीकृत हो सकेगी।








