जांच में सामने आया है कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में एक संगठित सिंडिकेट के जरिए शराब कारोबार में अवैध वसूली और कमीशन का खेल खेला गया। ईडी का दावा है कि इस पूरे घोटाले को राजनेताओं, आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कारोबारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया।
जांच में किन नामों का आया सामने
ईडी की जांच में सामने आया कि तत्कालीन सरकार के दौरान आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए शराब घोटाले को अंजाम दिया गया। आरोप है कि शराब की सप्लाई, कमीशन और लाइसेंसिंग प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया।
अब तक किन-किन की हो चुकी है गिरफ्तारी
इस मामले में अब तक कई बड़े और चर्चित नामों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर और सौम्य चौरसिया शामिल हैं।
इसके अलावा आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया था। हालांकि, इन अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।