कोरबा/पाली। विशेष रिपोर्ट।
हरनमुड़ी के 3 हजार ग्रामीण प्रदूषण की चपेट में, चार शिक्षण संस्थानों तक पहुंच रही कोयले की काली धूल; कलेक्टरों से कई बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप, अब हाईवे जाम कर आंदोलन की चेतावनी।
बिलासपुर से पाली-कटघोरा को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-130 पर संचालित तिवरता कोल बेनिफिकेशन प्लांट का प्रदूषण अब आसपास के ग्रामीणों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनता जा रहा है। प्लांट से उड़ने वाली कोयले की काली धूल और भारी वाहनों की आवाजाही से ग्राम पंचायत हरनमुड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित होने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि कोयले की धूल आंगनबाड़ी से लेकर प्राथमिक, माध्यमिक और हाईस्कूल तक पहुंच रही है, जिससे बच्चों और शिक्षकों के स्वास्थ्य को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है।
तीन हजार की आबादी पर प्रदूषण की मार, चार शिक्षण संस्थान प्रभावित होने का आरोप

बिलासपुर और कोरबा जिले की सीमा पर, लिम्हा टोल प्लाजा के समीप संचालित मेसर्स तिवरता कोल बेनिफिकेशन लिमिटेड का प्लांट ग्राम पंचायत हरनमुड़ी और ग्राम पंचायत लिम्हा के बीच स्थित है। ग्रामीणों के अनुसार, प्लांट की वेट प्रोसेसिंग क्षमता 0.96 मिलियन टन प्रतिवर्ष है और यहां उत्पादन जारी है।
हरनमुड़ी पंचायत के उत्तर से पश्चिम दिशा तक लगभग 3 हजार की आबादी निवास करती है। ग्रामीणों की आजीविका लगभग 800 एकड़ निजी एवं शासकीय कृषि भूमि पर निर्भर है। आरोप है कि प्लांट से निकलने वाली कोयले की धूल हवा के साथ आसपास के गांवों, खेतों और घरों तक पहुंच रही है। इसका असर अब बच्चों की पढ़ाई और स्कूलों के वातावरण पर भी दिखाई देने लगा है।
कक्षाओं में कोयले की धूल, मध्यान्ह भोजन तक में गिर रही काली राख!
ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी, प्राथमिक शाला, माध्यमिक शाला और हाईस्कूल परिसर में कोयले की महीन धूल लगातार जमा हो रही है। कक्षाओं में पढ़ाई के दौरान बच्चों और शिक्षकों को धूल के बीच बैठना पड़ता है। स्कूलों के ब्लैक बोर्ड और फर्नीचर तक पर काली परत जम जाती है। यहां तक कि मध्यान्ह भोजन में भी कोयले की धूल गिरने की शिकायत सामने आई है।
ग्रामीणों ने आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और त्वचा संबंधी समस्याओं की आशंका जताते हुए बच्चों के स्वास्थ्य की जांच और स्कूल परिसरों को प्रदूषण से सुरक्षित करने की मांग की है। उनका कहना है कि जिस उम्र में बच्चों को स्वच्छ वातावरण में शिक्षा मिलनी चाहिए, उस उम्र में उन्हें प्रदूषण के बीच पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है।
दिन-रात दौड़ रहे सैकड़ों भारी वाहन, सड़क और घरों पर कोयले की काली परत
प्लांट से कोयले का परिवहन करने वाले भारी-भरकम हाइवा और ट्रेलरों की लगातार आवाजाही भी ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रही है। आरोप है कि दिन-रात सैकड़ों भारी वाहन हाईवे से गुजरते हैं, जिससे सड़क पर धूल और कोयले की चूरी फैलती रहती है।
सूखे मौसम में यही धूल हवा के साथ उड़कर आसपास के घरों में प्रवेश करती है, जबकि बारिश के दिनों में सड़क पर कोयले की चूरी और कीचड़ के कारण फिसलन की स्थिति बन जाती है। इससे दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ने की बात ग्रामीणों ने कही है। सड़क किनारे बसे परिवारों का कहना है कि प्रदूषण और धूल के कारण सामान्य जीवन जीना भी मुश्किल होता जा रहा है।
कलेक्टरों को कई बार सौंपा ज्ञापन, फिर भी समाधान नहीं होने का आरोप
इस समस्या को लेकर ग्राम पंचायत हरनमुड़ी की सरपंच श्रीमती मथुरा जगत के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने कोरबा और बिलासपुर जिले के कलेक्टरों को कई बार हस्ताक्षरयुक्त लिखित आवेदन सौंपे हैं।

ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में प्लांट से निकलने वाले कोयले के धुएं, धूल और सूक्ष्म कणों से गांव की आबादी, जलस्रोतों, कृषि भूमि और पर्यावरण पर पड़ रहे संभावित दुष्प्रभावों की जांच कराने की मांग की है। साथ ही संयंत्र के संचालन, पर्यावरणीय मानकों और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी व्यवस्थाओं की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग उठाई है।
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत और आवेदन देने के बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। इससे ग्रामीणों में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।
अब आर-पार की लड़ाई के मूड में ग्रामीण, हाईवे जाम की चेतावनी
लगातार बढ़ती परेशानी और शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों का आक्रोश अब आंदोलन की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्लांट से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं लगाया गया, स्कूलों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध नहीं कराया गया और भारी वाहनों से फैल रही धूल पर रोक लगाने के ठोस इंतजाम नहीं किए गए, तो वे नेशनल हाईवे-130 पर चक्काजाम कर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है? क्या प्रदूषण नियंत्रण विभाग और जिला प्रशासन मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच करेंगे? क्या स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य और ग्रामीणों के स्वच्छ वातावरण में जीने के अधिकार को प्राथमिकता दी जाएगी?
हरनमुड़ी के ग्रामीणों की मांग साफ है—प्लांट के प्रदूषण की निष्पक्ष जांच हो, पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और बच्चों सहित आम नागरिकों को प्रदूषण से राहत दिलाई जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की इस गंभीर शिकायत पर कब तक ठोस कदम उठाता है।









