कोरबा/कटघोरा। ग्राम पंचायत मोहनपुर में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। पंचायत को मूलभूत मद से प्राप्त राशि का उपयोग गांव की जरूरी जरूरतों के बजाय सम्मेलन, शिविर और वाहन भाड़ा–नाश्ता जैसी गतिविधियों पर किया गया है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सरपंच जागेश्वर सिंह और सचिव रहीम अली ने मिलकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया। बता दें कि पिछली पंचवर्षीय अवधि में सरपंच की कुर्सी जागेश्वर सिंह की पत्नी सावित्री बाई के पास थी, लेकिन कामकाज में पूरे समय जागेश्वर सिंह की ही दखल रही। दोनों ने मिलकर मूलभूत व 15वें वित्त की राशि से जमकर मनमानी की।

1.37 लाख रुपये फर्जी खर्च में उड़ाए
पंचायत अभिलेखों के अनुसार –
40 हजार रुपये संकल्प यात्रा एवं सुशासन दिवस पर टेंट व मिष्ठान के नाम पर निकाले गए।
47 हजार रुपये राजीव युवा मितान शिविर, रायपुर जाने हेतु वाहन किराया पर खर्च दिखाया गया।
50 हजार रुपये पंच–सरपंच सम्मेलन, रायपुर में वाहन किराया व जलपान के नाम पर निकाले गए।

कुल मिलाकर 1 लाख 37 हजार रुपये का खर्च कागजों पर दिखाया गया है।
ग्रामीणों का सवाल
ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा कि – “क्या पूरा गांव बाराती बनकर रायपुर गया था, जो वाहन किराए पर इतनी बड़ी राशि खर्च कर दी गई?”
इसी तरह, सुशासन दिवस पर 10–12 हजार से ज्यादा खर्च संभव नहीं था, फिर भी 40 हजार रुपये निकाल लिए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि आम लोगों को सिर्फ मुर्रा–मिक्चर खिलाकर शेष राशि हड़प ली गई।
नियमों की अनदेखी
पंचायत विभाग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं कि मूलभूत मद की राशि केवल आवश्यक कार्यों—जैसे पेयजल, सफाई, नाली निर्माण, भवन मरम्मत, बिजली बिल, स्टेशनरी, स्कूल मरम्मत व राष्ट्रीय पर्वों पर मिठाई वितरण—में ही खर्च की जानी चाहिए। लेकिन मोहनपुर पंचायत ने इन नियमों को ताक पर रख दिया।

जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि मामले की जांच कराई जाए तो सच सामने आ जाएगा और यह स्पष्ट हो सकेगा कि मूलभूत राशि का दुरुपयोग कर बुनियादी विकास कार्यों को जानबूझकर उपेक्षित किया गया है।
फिलहाल मोहनपुर पंचायत में हुए इस घोटाले ने प्रशासन और विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में इस विषय पर और खुलासे की संभावना है।









