रामपुर/बिलासपुर। उत्तराखंड में हो रही लगातार बारिश और भाखड़ा डैम पर बने वियर गेटों के बंद होने से धीमरी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे बिलासपुर तहसील के रामनगर, पर्वतबास, बिशारदनगर, खौदलपुर, सहरिया, कादरीगंज, शिवनगर और रतनपुरा गांवों के खेत जलमग्न हो गए। इससे सैकड़ों किसानों की धान और गन्ने की फसलें तबाह होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
गुस्साए किसानों ने मंगलवार को भाकियू भानु गुट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मोहम्मद हनीफ वारसी के नेतृत्व में सिंचाई विभाग के दफ्तर पर प्रदर्शन किया। किसानों ने नारेबाजी करते हुए हाईवे स्थित विभागीय कार्यालय तक मार्च निकाला और वियर गेट खोलने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान सहायक अभियंता नंदलाल आर्या और अवर अभियंता वीर सिंह मौके पर पहुंचे, लेकिन किसान उनसे संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि फसलें नष्ट हुईं तो मुआवजा उनकी तनख्वाह से वसूला जाएगा।
किसान नेता मोहम्मद हनीफ वारसी ने बताया कि सामान्य दिनों में धीमरी नदी में लगभग चार फीट पानी रहता है, लेकिन हाल ही में डैम पर लगे ऑटोमैटिक वियर गेट बंद होने से पिछले एक सप्ताह से खेतों में आठ फीट तक पानी भरा है। यह जल निकासी न होने के कारण फसलों को गंभीर नुकसान हो रहा है।
प्रदर्शन में राशिद, जमील अहमद, गुरमीत सिंह, जसवंत सिंह, मोहम्मद साजिद, फरीद, सलामत, सतनाम सिंह, बूटा सिंह, आजाद सिंह, गुफरान अली, मुराद खां, शब्बीर खां, जवाहर सिंह, साहब सिंह, कुलवंत सिंह, जाहिद हुसैन, सुरेंद्र सिंह समेत बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।
इस संबंध में सहायक अभियंता नंदलाल आर्या ने बताया कि विभाग द्वारा डैम से जल स्तर कम किया जा रहा है और नदी में पानी का बहाव सामान्य होने लगा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और किसानों को हरसंभव राहत दी जाएगी।









