फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नरेंद्र की दमोह कोर्ट में पेशी, चार दिन की रिमांड पर छत्तीसगढ़ पुलिस को सौंपा गया बिलासपुर में भी मौत का मामला, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की संदिग्ध मौत से जुड़ा है केस

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दमोह | फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नरेंद्र यादव उर्फ डॉ. नरेंद्र जॉन केम को दमोह कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें चार दिन की रिमांड पर छत्तीसगढ़ पुलिस को सौंप दिया। डॉक्टर नरेंद्र पर दमोह के मिशन अस्पताल में हार्ट सर्जरी के बाद सात मरीजों की मौत का आरोप है। अब यह मामला राज्य से बाहर भी तूल पकड़ चुका है, क्योंकि बिलासपुर में भी इसी डॉक्टर के इलाज के दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की मौत का मामला सामने आया है।

छत्तीसगढ़ पुलिस को सौंपी गई रिमांड

दमोह पुलिस द्वारा रिमांड अवधि पूरी होने के बाद डॉक्टर नरेंद्र को कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान बिलासपुर के सरकंडा थाना पुलिस ने एक अन्य केस में रिमांड की मांग की, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्नेहा सिंह ने मंजूर कर लिया। डॉक्टर को अब चार दिन की रिमांड पर छत्तीसगढ़ पुलिस के हवाले कर दिया गया है।

सात मरीजों की मौत से फैली सनसनी

मध्य प्रदेश के दमोह स्थित मिशन अस्पताल में कथित हार्ट सर्जरी के बाद सात मरीजों की मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि सर्जरी करने वाला डॉक्टर न तो कार्डियोलॉजिस्ट है और न ही उसके पास मान्यता प्राप्त डिग्री। इस खुलासे के बाद प्रदेशभर में हड़कंप मच गया था। आरोपी डॉ. नरेंद्र जॉन केम को लेकर कई राज्यों की पुलिस अब सतर्क हो गई है।

कोर्ट में चेक देकर फीस चुकाई

पेशी के दौरान आरोपी डॉक्टर ने अपने वकील सचिन नायक की फीस और जरूरी खर्चों के लिए लीगल एडवाइजर मनीष नगाइच को एक लाख रुपये का चेक सौंपा। इस पर कोर्ट ने डॉक्टर से सवाल किया कि क्या वे लीगल एडवाइजर को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं, जिस पर आरोपी ने भरोसे की बात कही।

बिलासपुर में भी दर्ज है केस

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित सरकंडा थाना क्षेत्र में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र शुक्ला की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में भी डॉक्टर नरेंद्र पर गंभीर आरोप हैं और एफआईआर दर्ज है। मामले की पैरवी वकील मनीष नगाइच ने की, जिनके आग्रह पर कोर्ट ने मेडिकल परीक्षण के बाद डॉक्टर को पुलिस रिमांड पर सौंपने की अनुमति दी।

आगे क्या?

चार दिन की रिमांड पूरी होने के बाद डॉक्टर की फिर से पेशी होगी, जहां कोर्ट यह तय करेगा कि रिमांड बढ़ाई जाएगी या उन्हें फिर से दमोह जेल भेजा जाएगा। कोर्ट में डॉक्टर ने खुद कहा कि वह न्यायिक प्रक्रिया का पालन करेंगे और जांच में सहयोग देंगे।

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