बिलासपुर। चकरभाठा स्थित बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास कार्यों में हो रही देरी और नाइट लैंडिंग की व्यवस्था अब तक शुरू न होने को लेकर शुक्रवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने कड़ी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस ने सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए महाधिवक्ता से दो टूक कहा– “आप स्टेटमेंट दे दीजिए, हमसे कुछ नहीं हो पाएगा। लगता है अफसरों में काम करने की इच्छाशक्ति ही नहीं है।”
यह टिप्पणी अधिवक्ता संदीप दुबे और कमल दुबे द्वारा दायर जनहित याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई के दौरान की गई। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि एयरपोर्ट की स्थिति जस की तस है और यात्री सुविधाओं को लेकर कोई ठोस प्रगति नहीं हो रही है।
फोटोग्राफ्स पर भी भड़के चीफ जस्टिस
महाधिवक्ता प्रफुल्ल भारत ने जब एयरपोर्ट में हो रहे काम के फोटोग्राफ्स पेश किए, तो सीजे ने सख्त लहजे में कहा– “इन तस्वीरों में तो कुछ नजर ही नहीं आ रहा। एक गाड़ी और कुछ लोग खड़े हैं, काम कहां हो रहा है?”
जमीन मिलने के बाद भी अटका काम
कोर्ट को जानकारी दी गई कि रक्षा मंत्रालय ने रनवे विस्तार के लिए 286 एकड़ जमीन पर राज्य सरकार को काम करने की अनुमति दे दी है, फिर भी कार्य शुरू नहीं हुआ। इस पर सीजे ने पूछा कि अब अड़चन कहां है। जवाब में एजी ने बताया कि जमीन की कीमत को लेकर रक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच विवाद है।
चीफ सेक्रेटरी और रक्षा सचिव को नोटिस
नाराज चीफ जस्टिस ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और केंद्रीय रक्षा सचिव को तलब कर शपथ पत्र के साथ विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, “कोर्ट के आदेश के बाद भी अगर अफसर सक्रिय नहीं हो रहे तो यह बेहद गंभीर है। जवाब देने में टालमटोल की आदत बन गई है।”
“क्या कभी जागेगा बिलासपुर का भाग्य?”
सुनवाई के अंत में चीफ जस्टिस ने गहरी चिंता जताते हुए कहा– “क्या कभी बिलासपुर का भाग्य जागेगा? क्या कोई सरकार कुछ कर पाएगी?”








