बिलासपुर । आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर जल संसाधन विभाग के प्रार्थना सभा कक्ष में एक गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री तोखन साहू ने मीसा बंदियों एवं लोकतंत्र सेनानियों को शॉल व श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। यह आयोजन उन महान सेनानियों के योगदान को स्मरण करने के लिए किया गया, जिन्होंने आपातकाल के काले दौर में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हेतु संघर्ष किया था।
कार्यक्रम के दौरान “आपातकाल का काला अध्याय” विषय पर एक विशेष छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ भी मंत्री श्री साहू द्वारा किया गया। प्रदर्शनी में आपातकाल के दौरान हुए प्रमुख घटनाक्रमों, आंदोलनों, दमन, सेंसरशिप तथा लोकतंत्र की रक्षा हेतु किए गए संघर्षों का जीवंत चित्रण किया गया।
मंच से संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री साहू ने कहा, “मीसा बंदियों ने लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। उनका संघर्ष आज की पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्त्रोत है। उन्होंने हमें यह सिखाया है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव सजग रहना चाहिए।”
कार्यक्रम में मीसा बंदी परिवार की श्रीमती भावना पाठक ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि “आपातकाल के समय उनकी माता जी को यरवदा जेल (पुणे) में बंद कर दिया गया था, जबकि परिवार में 15 दिन बाद बहन की शादी थी। उन्हें जमानत तक नहीं मिली।”
मीसाबंदी संघ बिलासपुर के अध्यक्ष श्री गोवर्धन गुलहरे ने भी आपातकाल के अपने अनुभवों को साझा किया और उस दौर की पीड़ा को रेखांकित किया।
इस अवसर पर मंच पर मौजूद विशिष्ट जनों में शामिल थे:
🔹 विधायक धरमलाल कौशिक
🔹 विधायक धर्मजीत सिंह
🔹 महापौर श्रीमती पूजा विधानी
🔹 जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी
🔹 जिला भाजपा अध्यक्ष दीपक सिंह
कार्यक्रम में लगभग 40 लोकतंत्र सेनानी उपस्थित थे जिन्होंने सम्मान पाकर गर्व और उत्साह की अनुभूति जताई।
कार्यक्रम का संचालन श्री सौरभ सक्सेना द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया, जबकि जिला प्रशासन की ओर से अपर कलेक्टर एस.पी. दुबे ने सभी अतिथियों का सम्मान एवं आभार व्यक्त किया।
श्री साहू ने युवाओं से आह्वान किया कि “वे देश के संविधान की रक्षा और लोकतंत्र की मजबूती के लिए सजग प्रहरी बनें।”
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण की प्रतिबद्धता दोहराई।








