बिलासपुर/तखतपुर स्वराज जयसवाल की विशेष रिपोर्ट
बिलासपुर/तखतपुर विधानसभा क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग और कॉलोनी निर्माण का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। भाजपा नेता एवं जन कल्याण समाज सेवा संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बिहारी सिंह टोडर ने क्षेत्र में सक्रिय भू-माफियाओं और कॉलोनाइजरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कई स्थानों पर बिना वैध अनुमति के बड़े पैमाने पर प्लाटिंग और कॉलोनियों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे शासन को भारी राजस्व हानि हो रही है।

इस संबंध में उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, राजस्व मंत्री एवं बिलासपुर कलेक्टर के नाम अनुविभागीय अधिकारी तखतपुर को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि जिन स्थानों पर अवैध निर्माण कार्य चल रहा है, वहां तत्काल रोक लगाई जाए और जमीन की खरीद-बिक्री (रजिस्ट्री) को शून्य घोषित किया जाए।

बिहारी सिंह टोडर ने बताया कि तखतपुर क्षेत्र में कई बिल्डर बिना रेरा (RERA) की अनुमति और ग्राम एवं नगर निवेश विभाग से स्वीकृत लेआउट के बिना ही कॉलोनियों का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आम नागरिकों को भी भ्रमित कर अवैध रूप से प्लॉट बेचने का गंभीर मामला है।

उन्होंने तीन प्रमुख स्थानों का उल्लेख करते हुए बताया कि ग्राम परसदा और पेंडारी क्षेत्र में अलग-अलग बिल्डरों द्वारा अवैध कब्जा कर कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। कुछ स्थानों पर तो शासकीय भूमि तक पर अतिक्रमण कर लिया गया है। साथ ही, निर्माणाधीन कॉलोनियों से निकलने वाला पानी सीधे तालाबों में छोड़ा जा रहा है, जिससे भविष्य में जल निकासी और पर्यावरण से जुड़ी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

आरोप है कि संबंधित बिल्डर न केवल बिना अनुमति के प्लाटिंग कर रहे हैं, बल्कि सड़क, नाली, बाउंड्रीवॉल और मकान निर्माण जैसे कार्य भी नियमों की अनदेखी कर कराए जा रहे हैं। इससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

टोडर ने यह भी बताया कि पूरे तखतपुर विधानसभा क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों और प्लाटिंग की एक विस्तृत सूची तैयार की जा रही है। सूची तैयार होने के बाद इसे राज्य शासन को सौंपा जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन द्वारा समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो इस मुद्दे को लेकर विधानसभा स्तर पर जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।

इस मामले के सामने आने के बाद अब प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं और देखना होगा कि अवैध निर्माण के इस बढ़ते नेटवर्क पर कब और किस प्रकार अंकुश लगाया जाता है।








