रायपुर। प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे तहसीलों के दैनिक कामकाज और राजस्व संबंधी कार्यों पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है। हड़ताल की घोषणा तहसीलदार संघ द्वारा की गई है, जो अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है।
इससे पहले तहसीलदार संघ ने चरणबद्ध आंदोलन करते हुए 28 जुलाई को जिला स्तर, 29 जुलाई को संभाग स्तर और 30 जुलाई को राजधानी नवा रायपुर में प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन किया था। प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन के दौरान ही अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया गया।
ये हैं प्रमुख मांगें:
तहसीलदार संघ की मांगों में तहसीलों में पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति, डिप्टी कलेक्टर पद पर पारदर्शी प्रमोशन नीति (50:50 अनुपात), नायब तहसीलदार को राजपत्रित अधिकारी का दर्जा, ग्रेड पे में संशोधन और सभी तहसीलों को वाहन व ड्राइवर सुविधा जैसी मांगें शामिल हैं।
संघ ने यह भी मांग की है कि न्यायालयीन कार्यों को जनशिकायतों से अलग रखा जाए, जज प्रोटेक्शन एक्ट 1985 का पालन किया जाए, और आउटसोर्सिंग के माध्यम से स्टाफ की भर्ती का अधिकार तहसीलदारों को दिया जाए। इसके अलावा प्रशिक्षित ऑपरेटर की नियुक्ति, SLR/ASLR की पुनर्नियुक्ति, सरकारी मोबाइल नंबर की सुविधा, सुरक्षा गार्ड की तैनाती और दुर्घटना मुआवजा गाइडलाइन बनाने की मांगें भी सूची में शामिल हैं।
संघ यह भी चाहता है कि सरकार उसे औपचारिक मान्यता दे, ताकि समस्याओं के समाधान के लिए वार्ताकार के रूप में भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। साथ ही राजस्व न्यायालयों में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की गई है।
हड़ताल के चलते जमीन नामांतरण, बंटवारा, जाति-निवास प्रमाणपत्र, न्यायिक कार्यों सहित अन्य राजस्व संबंधी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। संघ का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
प्रशासन की चुनौती:
अब देखना यह है कि सरकार इस स्थिति से कैसे निपटती है और क्या जल्द समाधान के लिए वार्ता का रास्ता अपनाया जाता है या स्थिति और बिगड़ती है।








