IPL 2024: करोड़ों की नीलामी के बाद कितना टैक्स चुकाते हैं खिलाड़ी? जानें पूरी डिटेल

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नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का 18वां सीजन 22 मार्च से शुरू हो रहा है। हर साल इस लीग में खिलाड़ियों की नीलामी करोड़ों रुपये में होती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन खिलाड़ियों को इस भारी-भरकम राशि पर कितना टैक्स देना पड़ता है? खासकर भारतीय और विदेशी खिलाड़ियों के टैक्स नियम अलग-अलग होते हैं।

भारतीय खिलाड़ियों पर टैक्स नियम

भारतीय खिलाड़ियों को उनकी कुल आय पर भारतीय आयकर अधिनियम के तहत टैक्स चुकाना पड़ता है। आईपीएल से होने वाली आय पर 10% टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) लागू होता है। इसके बाद यह राशि खिलाड़ी की कुल आय में जुड़ती है और आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स निर्धारित किया जाता है।

विदेशी खिलाड़ियों के टैक्स नियम

आईपीएल में भाग लेने वाले विदेशी खिलाड़ियों को ‘नॉन-रेसिडेंट’ की श्रेणी में रखा जाता है। इनके लिए भारतीय आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115BBA के तहत कर लगाया जाता है। इस धारा के अनुसार, विदेशी खिलाड़ियों को आईपीएल से होने वाली आय पर 20% टीडीएस देना होता है। यह कर उनके अनुबंध की राशि से पहले ही काट लिया जाता है।

डबल टैक्सेशन से बचाव

कई विदेशी खिलाड़ियों के देशों के साथ भारत का ‘डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट’ (DTAA) है। इसके तहत, खिलाड़ी अपने गृह देश में टैक्स क्रेडिट के लिए पात्र हो सकते हैं। यदि कोई विदेशी खिलाड़ी भारत में 182 दिन से अधिक समय बिताता है, तो उसे ‘रेसिडेंट’ माना जाएगा और भारतीय नागरिकों की तरह टैक्स देना होगा।

भुगतान की प्रक्रिया

आईपीएल खिलाड़ियों को उनकी कॉन्ट्रैक्ट राशि प्राप्त करने के लिए बीसीसीआई (BCCI) और संबंधित फ्रेंचाइजी के साथ त्रिकोणीय अनुबंध (ट्रायंगुलर एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर करना होता है। यदि किसी कारणवश फ्रेंचाइजी भुगतान करने में विफल रहती है, तो बीसीसीआई उस राशि को फ्रेंचाइजी के सेंट्रल रेवेन्यू फंड से काटकर भुगतान सुनिश्चित करता है।

विशेषज्ञों की राय

बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, आईपीएल से मिलने वाली कमाई को प्रोफेशनल इनकम माना जाता है, और इसे खिलाड़ी की कुल वार्षिक आय में जोड़ा जाता है। इसके बाद कर स्लैब के आधार पर अंतिम टैक्स निर्धारित किया जाता है।

निष्कर्ष

आईपीएल में खिलाड़ियों को मिलने वाली भारी-भरकम रकम का एक बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में कट जाता है। भारतीय खिलाड़ियों को 10% टीडीएस, जबकि विदेशी खिलाड़ियों को 20% टीडीएस चुकाना पड़ता है। हालांकि, DTAA नियमों के तहत विदेशी खिलाड़ियों को कुछ राहत मिल सकती है।

 

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