कोरबा। महिलाओं और बच्चों की तस्करी व अनैतिक व्यापार पर रोक लगाने के लिए कोरबा कलेक्ट्रेट सभागार में प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम 1956 और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) योजना 2015 के तहत की गई। इसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने मानव तस्करी के बढ़ते खतरे, उसके रोकथाम के उपाय और पीड़ितों के पुनर्वास पर चर्चा की।
कार्यशाला में दी गई महत्वपूर्ण जानकारी
कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस और श्रम विभाग के सहयोग से पीड़ित महिलाओं और बच्चों के बचाव, पुनर्वास और प्रशिक्षण के उपायों पर जोर दिया गया। इसमें सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के तहत बच्चों की तस्करी रोकने के लिए प्रचार-प्रसार, बरामदगी और पुनर्वास योजनाओं पर चर्चा हुई।
तस्करी के मुख्य कारण और रोकथाम पर जोर
विशेषज्ञों ने बताया कि गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा और आर्थिक तंगी के कारण महिलाएं और बच्चे मानव तस्करी के गिरोहों का शिकार बनते हैं। अपराधी बलपूर्वक, प्रलोभन या धोखे से पीड़ितों को इस जाल में फंसाते हैं और उन्हें शारीरिक व मानसिक शोषण का शिकार बनाते हैं। छत्तीसगढ़ में जशपुर, सरगुजा, रायगढ़ और बस्तर जैसे जिले इस अपराध के दृष्टिकोण से संवेदनशील हैं।
विशेषज्ञों और अधिकारियों की मौजूदगी
इस कार्यशाला में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव डिंपल भेड़िया, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी गजेंद्र देव सिंह, सहायक आयुक्त श्रम विभाग राजेश आदिले, पुलिस उपनिरीक्षक शारदा वर्मा और घरेलू हिंसा मामलों की विशेषज्ञ रजनी मारिया ने भाग लिया।
कार्यशाला में जिला मिशन समन्वयक, पर्यवेक्षक, स्थानीय शिकायत समिति के सदस्य, विधिक सेवा प्राधिकरण के पीएलवी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी उपस्थित रहीं।
समाधान और सुझाव
विशेषज्ञों ने मानव तस्करी को रोकने के लिए सख्त निगरानी, सामुदायिक जागरूकता, शिक्षा और पुनर्वास योजनाओं को प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई। साथ ही, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस और श्रम विभाग के बेहतर समन्वय से इस अपराध पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही गई।










