रायगढ़। कोतरारोड़ थाना क्षेत्र में हुई रहस्यमयी मौत की गुत्थी को सुलझाते हुए पुलिस ने एक गहरी साजिश का पर्दाफाश किया है। इस मामले में 24 वर्षीय युवक जलेश्वर सारथी की हत्या को सड़क दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई थी। अब पुलिस ने जांच के बाद मामले का पूरा सच उजागर कर दिया है।
घटना का खुलासा उस समय हुआ जब 4 जून को मेडिकल कॉलेज रायगढ़ से पुलिस को उसरौट निवासी जलेश्वर की मौत की सूचना मिली। प्रारंभिक तौर पर मामला संदिग्ध दुर्घटना प्रतीत हुआ और कोतरारोड़ थाना में धारा 194 बीएनएस के तहत जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान मृतक के परिजनों और गांववालों से पूछताछ की गई, जिसमें सामने आया कि जलेश्वर को आखिरी बार 2 जून की रात गांव के ही सत्यनारायण सिदार के घर देखा गया था। इसके बाद कुछ ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि किशन सिदार उर्फ भूरू नामक युवक को गांव के नाले की रेलिंग पर पानी छिड़कते हुए देखा गया था।
पुलिस ने जब किशन सिदार को हिरासत में लेकर सघन पूछताछ की तो उसने कबूल किया कि वह सत्यनारायण सिदार के कहने पर खून से सने जूते और रेलिंग को धोकर सबूत मिटा रहा था।
इस अहम सुराग के बाद पुलिस ने सत्यनारायण को कड़ाई से पूछताछ की तो उसने भी हत्या की साजिश कबूल कर ली। उसने बताया कि 2-3 जून की रात उसका अपने भाई कृपाराम सिदार से झगड़ा हो रहा था, तभी जलेश्वर बीच-बचाव करने पहुंचा। गुस्से में आकर सत्यनारायण ने टांगी से जलेश्वर पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
इसके बाद हत्या को दुर्घटना का रूप देने की साजिश रची गई। सत्यनारायण के साथ भाई कृपाराम, रिश्तेदार डिलेश्वर, भाभी लक्ष्मीन सिदार और एक विधि से संघर्षरत बालक ने मिलकर घायल जलेश्वर को घर के पीछे से उठाकर गांव के नाले के पास लिटा दिया। फिर किशन सिदार को पैसे का लालच देकर खून के निशान मिटवाए गए।
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, वैज्ञानिक तरीकों और सतर्क पूछताछ के आधार पर इस साजिश को बेनकाब कर दिया। सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर कार्रवाई की जा रही है।








