दिल्ली में 10 नवंबर को हुए धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक ऐसी साजिश का पर्दाफाश हुआ है जिसने पूरे देश की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने खुलासा किया है कि वे 6 दिसंबर को देश के छह अलग-अलग शहरों में एक साथ बड़े पैमाने पर विस्फोट करने की तैयारी में थे। यह तारीख बाबरी मस्जिद ढहाने की बरसी का दिन है और आरोपियों ने इसे “1992 की घटना का बदला” लेने का वक्त माना था।
जांच अधिकारियों के अनुसार यह जानकारी मुख्य रूप से डॉ. शहीन शाहिद, उनके भाई डॉ. परवेज़ सईद अंसारी और डॉ. मुझम्मिल अहमद गणाई से मिली है। ये तीनों दिल्ली धमाके के मामले में 10 नवंबर को गिरफ्तार किए गए थे और आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े मॉड्यूल के सक्रिय सदस्य बताए जा रहे हैं।
पूछताछ में सामने आया है कि यह मॉड्यूल न केवल धन जुटाने में लगा था, बल्कि हमले को अंजाम देने के लिए आवश्यक सामग्रियों के परिवहन की भी प्लानिंग कर रहा था। एजेंसियां अब इनकी गतिविधियों, फंडिंग के तरीकों और संभावित नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं।
सुरक्षा एजेंसियां इस मॉड्यूल के कई अन्य सदस्यों — डॉ. अदील, डॉ. मुझम्मिल, मौलवी इरफान अहमद, आरिफ निसार डार, यासिर-उल-अशरफ, मकसूद अहमद और ज़मीर अहमद अहंगर से भी पूछताछ कर रही हैं। इनसे संगठन की कार्यशैली और वित्तीय तंत्र से जुड़े अहम सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर टीमें और गहरी पड़ताल कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि अब तक कुल नौ लोगों को यूपी, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि यूपी के लखनऊ, कानपुर और हापुड़ से तीन अन्य लोगों — डॉ. परवेज़, डॉ. आरिफ मीर और डॉ. फ़ारूक अहमद डार — को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
यह बड़ा खुलासा बताता है कि सुरक्षा एजेंसियों की समय रहते की गई कार्रवाई के कारण देश एक व्यापक आतंकी हमले से बच गया। फिलहाल जांच तेज गति से आगे बढ़ रही है और आने वाले दिनों में इस साजिश से जुड़े और भी अहम तथ्य सामने आने की संभावना है।









