Parliament Winter Session : चुनाव सुधार बहस में राहुल गांधी का बयान, कहा—RSS सभी संस्थाओं पर कब्जा करना चाहता है

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शीतकालीन सत्र में मंगलवार को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी चुनाव सुधारों पर हो रही चर्चा में शामिल हुए। चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि आरएसएस सभी संस्थाओं पर कब्जा करना चाहता है। नाथूराम गोडसे ने गांधी को मारा। यह असहज करने वाला सत्य है।

चुनाव सुधार पर चर्चा के दौरान सदन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की छाती में तीन गोलियां लगीं। नाथूराम गोडसे ने हमारे राष्ट्रपिता की हत्या कर दी। आज हमारे दोस्तों ने उन्हें दूर धकेल दिया है। वह एक असहज सच्चाई हैं, लेकिन प्रोजेक्ट यहीं खत्म नहीं हुआ। जैसा कि मैंने कहा, सब कुछ वोट से निकला है। सभी संस्थाएं वोट से निकली हैं। इसलिए यह साफ है कि आरएसएस को उन सभी संस्थाओं पर कब्जा करना होगा जो वहां से निकली हैं।

राहुल गांधी ने कहा, सभी जानते हैं कि कैसे भारत के विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलरों की नियुक्ति हो रही है। उन्होंने कहा कि इससे कोई मतलब नहीं है कि व्यक्ति की योग्यता क्या है, बस उसकी एक योग्यता है कि वह संघ से जुड़ा हो। इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी से कहा कि आप चुनाव सुधार पर ही बोलिए, किसी संगठन का नाम मत लीजिए। राहुल के बायन पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हम सभी लोग नेता प्रतिपक्ष को सुनने के लिए ही बैठे हैं। अगर वह विषय पर ही नहीं बोलेंगे, तो क्यों समय खराब कर रहे हैं सबका।

चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
सत्ता पक्ष के हंगामे पर राहुल गांधी ने कहा कि मैंने कुछ भी गलत नहीं कहा है। शिक्षण संस्थाओं पर कब्जा किया गया है। सीबीआई, ईडी पर भी एक संस्था से जुड़े लोगों ने कब्जा किया गया है। तीसरी संस्था चुनाव आयोग पर भी एक संस्था का कब्जा है, जो देश में चुनाव को नियंत्रित करती है। मेरे पास इसके सबूत हैं। भाजपा लोकतंत्र को खत्म करने के लिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर रही है। सीजेआई को सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया से हटाया गया। एक तरफ पीएम मोदी और अमित शाह बैठे थे और दूसरी तरफ मैं। किसी प्रधानमंत्री ने ऐसा नहीं किया। दिसंबर 2023 में नियम बदल यह प्रावधान किया कि किसी भी चुनाव आयुक्त को दंडित नहीं किया जा सकता। यह 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले किया गया। सीसीटीवी और डेटा को लेकर नियम बदले गए। सत्ता के साथ चुनाव आयोग का तालमेल है। यह डेटा का सवाल नहीं, चुनाव का सवाल है।

 

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