पोड़ी उपरोड़ा बीईओ पर नियमों की अनदेखी का आरोप, जिपं अध्यक्ष की फटकार के बाद संलग्नीकरण आदेश रद्द

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जिला पंचायत के सामान्य सभा की बैठक से गायब कटघोरा वनमंडल के अधिकारियों पर भड़के जिपं. अध्यक्ष, कहा- सदस्यों के साथ शासन को कार्रवाई के लिए कराएंगे अवगत.

कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा : छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा शिक्षा विभाग में ट्रांसफर पालिसी लागू करने के साथ ही संलग्नीकरण को पूरी तरह से समाप्त करने के निर्देश के विपरीत अटैचमेंट के खेल को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग महानदी भवन मंत्रालय रायपुर के अपर सचिव आरपी वर्मा द्वारा प्रदेश के सभी कलेक्टरों को 2 सितंबर को जारी आदेश क्रमांक एफ- 06 /2014/ 20- 2 (तीन) में आदेशित किया गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की कार्यवाही सम्पन्न की गई है। इसके पश्चात भी कतिपय जिलों से शिक्षकों के संलग्नीकरण की जानकारी प्राप्त हो रही है, जो कि उचित नही है।

पूर्व में भी शिक्षकों के संलग्नीकरण पर रोक लगाई गई है। अतः आदेशानुसार निर्देशित किया जाता है कि किसी भी प्रकार के शिक्षकों का संलग्नीकरण न किया जाये। लेकिन लगता है शासन का यह आदेश कोरबा जिले में लागू नही है, तभी तो शिक्षा विभाग के अधिकारी इस आदेश को हवा में उड़ा रहे है। पोड़ी उपरोड़ा में पदस्थ बीईओ के. राजेश्वर दयाल तो बिल्कुल उल्टी गंगा बहा रहे है तथा सरकारी मुलाजिम होने के बाद भी इन्होंने न केवल शासन आदेश को दरकिनार किया, बल्कि कलेक्टर से बगैर अनुमोदन शिक्षक के अटैचमेंट का खेला किया।

जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी की मौन सहमति भी परिलक्षित हो रही। बता दें कि बीईओ दयाल ने 9 अक्टूबर 2025 को अपने स्तर पर जारी आदेश क्रमांक- शि- स्था./ 2025- 26/ 2200 के तहत माध्यमिक शाला माचाडोली में पदस्थ एलबी शिक्षिका श्रीमती रामेश्वरी रात्रे को माध्यमिक शाला चोटिया में संलग्न कर दिया। जारी जिस आदेश में उल्लेख है कि उक्त शिक्षिका को अध्यापन हेतु उनके सहमति के आधार पर शिक्षक विहीन संस्था में अध्यापन व्यवस्था के तहत कार्य करने हेतु आदेशित किया जाता है, वेतन पूर्व संस्था से आहरित होगी। इस आदेश की प्रतिलिपि जिला शिक्षा अधिकारी की ओर सूचनार्थ हेतु दर्शाया गया है।

जिसे लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि जब संकुल प्राचार्य लमना अंतर्गत माध्यमिक शालायें है, वहां के शिक्षक को व्यवस्था के तहत अध्यापन न कराकर लगभग 35- 40 किलोमीटर दूर अन्य संकुल के प्राचार्य डीडीओ अंतर्गत शिक्षिका को संलग्न करने की क्यों आवश्यकत पड़ी? और बीईओ दयाल के जिस करतूत की शिकायत जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह से की गई। जहां बीते 30 अक्टूबर को जिला पंचायत के सामान्य सभा की बैठक में जिपं. अध्यक्ष ने शासन नियम के विपरीत कार्य करने पर उपस्थित बीईओ के. राजेश्वर दयाल को जमकर फटकार लगाया, तब बीईओ दयाल बगलें झांकने लगे। जिपं. अध्यक्ष ने तल्ख लब्जे में संलग्नीकरण का खेल करते हुए शिक्षकों को अटैचमेंट का लाभ देने का कृत्य दोबारा न दोहराने तथा कामकाज में सुधार लाने कहा। जिसके परिणामस्वरूप बीईओ ने शिक्षिका रामेश्वरी रात्रे का अटैचमेंट आदेश निरस्त किया।

पैसे दो और मनचाहे स्कूल में संलग्न हो जाओ
पोड़ी उपरोड़ा ब्लाक के मनचाहे सरकारी स्कूलों में पदस्थापना का खेल बीईओ दयाल द्वारा खूब खेला जा रहा है। इस मामले में बीईओ ने सभी नियम- कायदों को दरकिनार कर दिया है। पैसे दो और अपने पसंदीदा स्कूल में संलग्न हो जाओ की नीति के तहत अधिकारी से सांठगांठ कर संलग्नीकरण का लाभ उठाने वाले शिक्षक अधिकांश दिन पढ़ाने नही जाते। ऐसे शिक्षकों को शिक्षाधिकारी का पूरा संरक्षण रहता है, जबकि सामान्य शिक्षकों को नियमो का कड़ाई से पालन कराया जाता है। इसमें अप्रत्यक्ष रूप से जिला शिक्षाधिकारी का भी मौन संरक्षण रहता है। ऐसे मामले में जिला प्रशासन को स्वतः संज्ञान लेने की महती आवश्यकता है।

सामान्य सभा की समीक्षा बैठक में नही पहुँचे कटघोरा वनमंडल के अधिकारी, जिला पंचायत अध्यक्ष भड़के

बीते गुरुवार को जिला पंचायत के सामान्य सभा की बैठक में पांच विभागों की समीक्षा प्रस्तावित थी। जिसमे पीडब्ल्यूडी, वनमंडल कोरबा- कटघोरा, शिक्षा विभाग और सहायक आयुक्त आबकारी विभाग की समीक्षा की जानी थी। बैठक में नियत समय पर जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह सहित सभी सदस्य पहुँच गए, इसके अलावा पीडब्ल्यूडी, कोरबा वनमंडल, शिक्षा व आबकारी विभाग के अधिकारी भी समय पर पहुँच गए और पूरे समय विभागों की समीक्षा में उपस्थित रहे, किंतु कटघोरा वनमंडल के अधिकारी पूरे समीक्षाकाल के दौरान नही पहुँचे।

इसे लेकर जिपं. अध्यक्ष डॉ. सिंह भड़क गए और नाराजगी कड़ी जाहिर करते हुए कहा कि पांच विभागों की समीक्षा सामान्य सभा मे रखी गई थी। लेकिन कटघोरा वनमंडल के अधिकारी आज तीसरी बार भी नही पहुँचे। उन्होंने कहा कि वनमंडल कटघोरा के लापरवाह डीएफओ, एसडीओ अपने जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर नही है। जो सामान्य सभा की बैठक को गंभीरता से नही ले रहे और अपनी मनमानीं पे आमादा रहकर भ्रष्ट्राचार में मस्त है। इनके भ्रष्ट्र कृत्य उजागर न हो इसलिए सामान्य सभा की बैठक से लगातार तीसरे बार अनुपस्थित रहे। अध्यक्ष ने सदस्यों के साथ कार्रवाई के लिए शासन को अवगत कराने की बात कही है

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