पश्चिम बंगाल की राजनीति में एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को लेकर आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं। विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बोंगांव में आयोजित एक बड़े जनसभा में भाजपा और चुनाव आयोग पर खुलकर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा राजनीतिक रूप से उनका मुकाबला नहीं कर पा रही है, इसलिए संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ‘बीजेपी कमीशन’ बताते हुए कहा कि आयोग अब निष्पक्ष संस्था नहीं रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा शासित राज्यों में भी एसआईआर प्रक्रिया चल रही है, तो क्या केंद्र सरकार यह स्वीकार कर रही है कि उन राज्यों में ‘घुसपैठिया’ मौजूद हैं? उन्होंने कहा कि “मैं बीरभूम की जन्मी हूँ, वरना मुझे भी बांग्लादेशी कह देते।”
हेलीकॉप्टर विवाद पर भी साधा निशाना
अपने भाषण की शुरुआत में ममता बनर्जी ने भाजपा पर यह कहते हुए हमला बोला कि चुनाव से ठीक पहले हेलीकॉप्टर को लेकर अवरोध पैदा किया गया। उन्होंने कहा, “मेरे पास सिर्फ एक सरकारी हेलीकॉप्टर है, वह भी किराए पर। सुबह पता चला कि हेलीकॉप्टर नहीं जा सकेगा। लेकिन इस बहाने रास्ते में लोगों से मिलने का मौका मिला और मेरा जनसंपर्क और मजबूत हुआ।”
‘भाजपा मेरे खेल को छू नहीं सकती’
बनर्जी ने कहा कि वे सड़क पर चलकर जनता से सीधे संवाद करती हैं और यही उनकी ताकत है। “मैंने भाजपा से कहा है—मैं जो खेल खेलूँगी उसमें मुझे कोई छू नहीं सकता,” उन्होंने दावा किया।
एसआईआर को बताया समयसाध्य, नियमों पर सवाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में तीन साल लगते हैं और पहले भी इसी तरह लोगों को परेशान किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों में बार-बार बदलाव कर मतदाताओं को असुविधा दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि “आयोग यह तय नहीं कर सकता कि सरकार में कौन बैठेगा। चुनाव आयोग को निष्पक्ष रहना चाहिए।” ममता ने आधार कार्ड प्रक्रिया का उदाहरण देते हुए कहा कि लोगों को आर्थिक और समय की हानि उठानी पड़ रही है।
बंगाल चुनाव से पहले एसआईआर प्रक्रिया पर इस बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।










