कोरबा/पाली – भाजपा जिला कार्यसमिति सदस्य और उपसरपंच कीर्ति कश्यप ने पाली जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) भूपेंद्र सोनवानी पर गंभीर भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और अफसरशाही के आरोप लगाते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सीईओ की कार्यप्रणाली पर लगाम नहीं लगाई गई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
डोंगानाला निवासी कीर्ति कश्यप ने आरोप लगाया कि सीईओ सोनवानी के पदभार संभालने के बाद से पाली जनपद में भ्रष्टाचार चरम पर है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा भेजी गई विकास योजनाओं की राशि जारी करने से पहले भारी कमीशन की मांग की जाती है। जो सरपंच कमीशन देने को तैयार होता है, उसी क्षेत्र के विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाती है।
कई मदों में कमीशन की मांग
कीर्ति कश्यप ने बताया कि सीईओ द्वारा पंचायतों से 15वें वित्त आयोग की राशि जारी करने, तकनीकी स्वीकृति फाइल भेजने, और निर्माण कार्यों की मंजूरी के बदले 7-8% कमीशन की मांग की जाती है। यहां तक कि पंचायतों से “सुशासन तिहार” और चुनावी खर्च के नाम पर भी अवैध वसूली की जा रही है।
ट्रांसफर के बावजूद एक ही जगह पर तैनाती
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों सीईओ का पाली जनपद से मोह नहीं छूट रहा है। ट्रांसफर के बाद भी बार-बार एक ही स्थान पर उनकी पोस्टिंग यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के जरिए भारी कमाई की जा रही है।
फाइल लौटाकर की सीधी कमीशन की मांग
कीर्ति कश्यप ने खुलासा किया कि जब उन्होंने अपने ग्राम पंचायत डोंगानाला में पीडीएस भवन की तकनीकी स्वीकृति के लिए फाइल सीईओ के पास भेजी, तो उन्होंने सीधे कमीशन की मांग की। उन्होंने यहां तक कह दिया कि “जिला सीईओ के कहने पर कमीशन तय किया गया है”, और कमीशन न देने पर फाइल लौटा दी गई।
भ्रष्टाचार से पस्त पंचायतें, कमजोर हो रहे विकास कार्य
पाली जनपद की 93 पंचायतों में सरपंच और सचिव दबाव में हैं। कीर्ति कश्यप का कहना है कि भारी कमीशन के चलते निर्माण कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और जनप्रतिनिधियों को जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार की छवि पर दाग
उन्होंने कहा कि एक ओर राज्य की सरकार ग्रामीण विकास को लेकर गंभीर है, वहीं दूसरी ओर ऐसे अधिकारी सरकारी योजनाओं को पलीता लगा रहे हैं और सरकार की छवि धूमिल कर रहे हैं।
माओवाद प्रभावित क्षेत्र में हो तबादला
भाजपा नेता ने मांग की कि सीईओ भूपेंद्र सोनवानी का तबादला माओवाद प्रभावित क्षेत्र में किया जाए ताकि पंचायतों की व्यवस्था सुधरे। साथ ही उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे भाजपा समर्थित सरपंचों और जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।








