पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। ममता बनर्जी की आपत्ति, बीजेपी का पलटवार और अमित शाह का राष्ट्रीय सुरक्षा वाला बयान—पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
बंगाल में SIR को लेकर बढ़ा संघर्ष
कोलकाता और पूरे पश्चिम बंगाल में SIR prakriya को लेकर राजनीति उफान पर है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि यह राज्य विशेष को निशाना बनाने वाला कदम है। दूसरी ओर बीजेपी का कहना है कि चाहे कुछ भी हो जाए, बंगाल में SIR हर हाल में लागू किया जाएगा। यह टकराव राज्य की Bengal rajneeti को और तीखा बना रहा है।
अमित शाह ने SIR पर दिया कड़ा संदेश
कच्छ के भुज में BSF के 61वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में पहुंचकर गृह मंत्री अमित शाह ने SIR prakriya की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने कहा कि देश में घुसपैठ रोकना सिर्फ सुरक्षा का सवाल नहीं है बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने का मुद्दा भी है। शाह ने कहा कि कुछ दल घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं और मतदाता सूची में चल रहे शुद्धिकरण को बाधित करना चाहते हैं। उनका यह बयान राष्ट्रीय स्तर पर ghuspeth roktham बहस को और तेज कर रहा है।
चुनाव आयोग को कमजोर करने का आरोप
बीजेपी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि ममता बनर्जी आयोग को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उनका दावा है कि वर्षों से पोषित ‘अवैध वोट बैंक’ को बचाने के लिए matdata suchi शुद्धिकरण का विरोध किया जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि बंगाल में SIR रुकने वाला नहीं है।
घुसपैठ रोकना लोकतांत्रिक सुरक्षा का मुद्दा—शाह
अमित शाह ने अपने X पोस्ट में लिखा कि देश की सीमाओं पर BSF लगातार घुसपैठियों को रोकने में लगी है। उनका कहना है कि ghuspeth roktham न सिर्फ सुरक्षा बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता के लिए जरूरी है। शाह का बयान सीधे तौर पर उन दलों पर हमला माना जा रहा है जो SIR पर सवाल उठा रहे हैं।
कांग्रेस भी मैदान में उतरी—दिल्ली में विशाल रैली की तैयारी
SIR को लेकर कांग्रेस भी सक्रिय हो गई है। पार्टी दिसंबर के पहले सप्ताह में दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली करेगी। इससे पहले 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही SIR prakriya की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने नेताओं को निर्देश दिया कि बूथ स्तर पर BLA की तैनाती की जाए और जनता को बताया जाए कि यह लड़ाई लोकतंत्र बचाने की है। उन्होंने कहा कि संघर्ष दो मोर्चों पर लड़ा जाएगा—कानूनी लड़ाई और जनजागरूकता अभियान।
राजनीतिक तापमान और बढ़ने के आसार
पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में SIR prakriya को लेकर तेजी से राजनीतिक ध्रुवीकरण हो रहा है। केंद्र, विपक्ष, राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच संवाद और टकराव आने वाले दिनों में और भी तीखे होने की संभावना है। Bengal rajneeti आने वाले महीनों में इसी मुद्दे के इर्द-गिर्द घूमती नज़र आ सकती है।









