अक्टूबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई भारतीय टीम के लिए वनडे सीरीज कुछ खास नहीं रही थी। इस दौरे पर टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली पहले दो मैचों में डक पर आउट होकर बुरी तरह संघर्ष करते दिखे थे। तीसरे वनडे में उन्होंने जरूर 74 रन बनाए, लेकिन उनके फॉर्म को लेकर सवाल उठने लगे थे—क्या विराट इस लय के साथ 2027 वर्ल्ड कप तक खेल पाएंगे?
लेकिन साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में कोहली ने वह जवाब मैदान पर दिखा दिया, जिसकी सभी को प्रतीक्षा थी। उन्होंने रांची और रायपुर दोनों वनडे में शतक जड़कर शानदार वापसी दर्ज कराई।
रांची वनडे: अटैकिंग मोड में दिखे किंग कोहली
रांची में पहले वनडे में विराट कोहली बल्लेबाजी के लिए उतरे तो शुरू से ही उनका अंदाज बेहद आक्रामक था।
- उन्होंने 102 गेंदों में शतक पूरा किया।
- इसके बाद तेजी से रन बनाते हुए 135 रन की तूफानी पारी खेली।
- रनिंग बिटवीन द विकेट्स में उनकी फुर्ती साफ नजर आई।
- शतक के बाद विराट का सेलिब्रेशन भी बेहद भावुक रहा—
- हवा में जंप,
- पंचेस,
- वेडिंग रिंग को चूमना,
- और आसमान की ओर देखकर भगवान का आभार जताना।
उनकी बॉडी लैंग्वेज बताती थी कि ये शतक उनके लिए लंबे इंतजार के बाद आया है।
रायपुर वनडे: क्लासिक कोहली स्टाइल में शतकीय पारी
रायपुर में विराट ने अपना पुराना ‘किंग मोड’ वापस दिखाया।
- शुरुआत लुंगी एंगिडी पर शानदार सिक्स के साथ की।
- 47 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया।
- स्ट्राइक रोटेशन पर बेहतरीन नियंत्रण दिखाया।
- 90 गेंदों में शतक पूरा किया।
हालांकि रांची के मुकाबले उनका सेलिब्रेशन शांत और संयमित था।
यहां कोहली की पारी में स्थिरता, जिम्मेदारी और परिपक्वता स्पष्ट दिखी।
विराट के आउट होते ही रन रेट पर पड़ा असर
दोनों मैचों में कोहली शतक के बाद तेजी से रन बनाने की कोशिश करते रहे।
- रांची में वे इसमें सफल रहे,
- लेकिन रायपुर में 102 रन पर आउट हो गए।
कोहली जानते थे कि मिडिल ऑर्डर दबाव में रह सकता है, इसलिए उन्होंने बड़ी पारी के इरादे से बल्लेबाजी की।
उनके आउट होने के बाद भारतीय टीम की रन गति धीमी पड़ती दिखाई दी। शतक के बाद उनकी निराशा भी साफ झलक रही थी, क्योंकि वह टीम को एक विशाल स्कोर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी खुद निभाना चाहते थे।
नतीजा: कोहली ने साबित किया—किंग कभी फॉर्म नहीं खोता
ऑस्ट्रेलिया सीरीज के बाद उठ रहे सवालों का विराट कोहली ने बल्ले से करारा जवाब दिया।
रांची और रायपुर के शतकों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि
“फॉर्म अस्थायी है, लेकिन क्लास कायम रहती है।”









