भारत का नया हीरो… मुंबई के लाल को धोनी ने CSK में चमकाया, U19 वर्ल्ड कप जीत विराट कोहली के क्लब में शामिल

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भारत का नया हीरो… मुंबई के लाल को धोनी ने CSK में चमकाया, U19 वर्ल्ड कप जीत विराट कोहली के क्लब में शामिल

Ayush Mhatre U19 World Cup: भारत ने अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड को हराकर खिताब जीत लिया है. उसने शुक्रवार (6 फरवरी) को हरारे में 100 रनों से बड़ी जीत हासिल की. टीम इंडिया ने छठी बार टाइटल को अपने नाम किया है. वैभव सूर्यवंशी की 80 गेंदों में 175 रनों की तूफानी पारी भारत की जीत की नींव थी. कप्तान आयुष म्हात्रे ने एक शानदार अर्धशतक बनाया. उन्होंने 51 गेंद पर 53 रनों की पारी खेली।

 

Ayush Mhatre U19 World Cup: भारत ने अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड को हराकर खिताब जीत लिया है. उसने शुक्रवार (6 फरवरी) को हरारे में 100 रनों से बड़ी जीत हासिल की. टीम इंडिया ने छठी बार टाइटल को अपने नाम किया है. वैभव सूर्यवंशी की 80 गेंदों में 175 रनों की तूफानी पारी भारत की जीत की नींव थी. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 9 विकेट पर 411 रन बनाए. जवाब में इंग्लैंड की टीम 40.2 ओवर में 311 रनों पर ढेर हो गई।

 

आयुष म्हात्रे ने रचा इतिहास

कप्तान आयुष म्हात्रे ने एक शानदार अर्धशतक बनाया. उन्होंने 51 गेंद पर 53 रनों की पारी खेली. उन्होंने खिताब जीतकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की. वह अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाले भारत के खास कप्तानों की लिस्ट में शामिल हो गए. उन्होंने विराट कोहली और मोहम्मद कैफ जैसे दिग्गजों की लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवा लिया. कैफ अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाले पहले भारतीय कप्तान थे. उनके बाद विराट ने इस उपलब्धि को हासिल किया था।

 

अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाले भारतीय कप्तान

2000 – मोहम्मद कैफ

2008 – विराट कोहली

2012 – उन्मुक्त चंद

2018 – पृथ्वी शॉ

2022 – यश ढुल

2026 – आयुष म्हात्रे

 

विरार के दूर-दराज के इलाकों में प्लास्टिक का बल्ला चलाने वाले एक छोटे बच्चे से लेकर 2026 अंडर-19 वर्ल्ड कप में देश का नेतृत्व करने तक आयुष म्हात्रे की कहानी मुंबई की क्रिकेटिंग सर्किट में काफी अनोखी है. आयुष की कहानी ढाई साल की उम्र में शुरू हुई. उनके पिता योगेश ने एक बार बताया था कि एक बार इस छोटे बच्चे ने सहजता से पुल शॉट मारा और प्लास्टिक की गेंद उनके बंगले के ऊपर से निकलकर पेड़ों में गायब हो गई. पांच साल की उम्र तक विरार के लोकल कोच उन्हें ‘शुद्ध सोना’ कहने लगे थे. अपने बेटे में खास टैलेंट को पहचानते हुए योगेश ने साउथ मुंबई के कॉम्पिटिटिव मैदानों पर नजर डाली।

 

नाना का बलिदान

सफलता का रास्ता सचमुच बहुत लंबा था. अकादमियों से 80 किमी दूर रहने के कारण म्हात्रे परिवार को लॉजिस्टिक्स की बहुत बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा. माता-पिता दोनों के काम करने के कारण आयुष के रिटायर्ड नाना आगे आए. लगभग एक दशक तक दोनों ने भीड़ वाली विरार-चर्चगेट लोकल ट्रेनों का सामना किया. आयुष का रूटीन बहुत थकाने वाला था. सुबह 5 बजे उठना, स्कूल जाना, प्रैक्टिस के लिए घंटों यात्रा करना और रात 8 बजे वापस आकर घर पर 45 मिनट और प्रैक्टिस करना।

 

 

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