ईडी समन से छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल, सुकमा-कोंटा राजीव भवन निर्माण पर जवाब आज

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रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भेजे गए समन से छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल मची हुई है। कांग्रेस ने इस संबंध में बैठक आयोजित कर चार बिंदुओं पर विस्तृत जवाब तैयार किया है, जिसे आज ईडी को सौंपा जाएगा। यह मामला सुकमा और कोंटा में बने कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन के निर्माण और पूर्व मंत्री कवासी लखमा से जुड़े शराब घोटाले से जुड़ा हुआ है।

ईडी के समन पर कांग्रेस की आपात बैठक

ईडी ने 25 फरवरी को रायपुर स्थित कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन पहुंचकर संगठन महामंत्री मलकीत सिंह गैदू को समन सौंपा था। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत के बंगले पर कांग्रेस नेताओं की एक गोपनीय बैठक हुई, जिसमें ईडी द्वारा मांगी गई जानकारी पर चर्चा की गई। बैठक में तय किया गया कि कांग्रेस ईडी को सभी बिंदुओं पर विस्तार से जवाब देगी।

ईडी ने मांगी ये प्रमुख जानकारियां

ईडी ने सुकमा और कोंटा में बने कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन के निर्माण को लेकर चार प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी मांगी है—

  1. फंडिंग का स्रोत: भवन निर्माण के लिए धन कहां से आया?
  2. निर्माण की शुरुआत: इस प्रोजेक्ट की शुरुआत कब हुई?
  3. निर्माण कार्य: इसे बनाने का ठेका किसे दिया गया?
  4. वित्तीय ब्योरा: निर्माण से जुड़ा पूरा वित्तीय विवरण क्या है?

ईडी कार्यालय पहुंचे कांग्रेस नेता

कांग्रेस के संगठन महामंत्री मलकीत सिंह गैदू आज ईडी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने जानकारी दी कि ईडी को 30 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाएगी, जिसमें निर्माण से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई है। कांग्रेस ने कहा है कि राजीव भवन निर्माण की पाई-पाई का हिसाब दिया जाएगा।

शराब घोटाले से भी जुड़ा है मामला

ईडी की जांच शराब घोटाले से भी जुड़ी हुई है, जिसमें करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। इस मामले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा की भूमिका की भी जांच हो रही है। ईडी पहले भी कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है और दस्तावेज जब्त किए जा चुके हैं। अब राजीव भवन निर्माण की जांच से नई जानकारियां सामने आने की संभावना है।

आज ईडी को सौंपा जाएगा जवाब

कांग्रेस आज 27 फरवरी को ईडी को अपना जवाब सौंपेगी। इसमें सुकमा और कोंटा के कांग्रेस कार्यालय के निर्माण से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी जाएगी, जिसमें खरीदी गई भूमि, निर्माण कार्य की शुरुआत, खर्च, ठेकेदार और फंडिंग का स्रोत शामिल होगा।

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