कोरबा/पाली: सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 (Right to Information Act 2005) देश में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया था। इस कानून के तहत नागरिकों को सरकारी विभागों से जानकारी प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। लेकिन पाली जनपद पंचायत कार्यालय में यह कानून महज एक मजाक बनकर रह गया है। जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) भूपेंद्र सोनवानी ने सूचना देने से इनकार करते हुए यहां तक कह दिया कि “ज़रूरी नहीं कि हर आदेश का पालन किया जाए।”
आरटीआई आवेदन पर सीईओ का टालमटोल रवैया पाली (मादन) निवासी और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के जिला महामंत्री विजय (बादल) दुबे ने 25 जुलाई 2024 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत रीपा कार्य, बाड़ी विकास योजना, एनजीओ को दिए गए कार्यों, सोलर स्ट्रीट लाइट व हाई मास्ट लाइट से संबंधित भुगतान बिल और वाउचर की सत्यापित प्रतियां मांगी थीं। लेकिन निर्धारित समय सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
सूचना न मिलने पर विजय दुबे ने 31 अगस्त 2024 को जिला पंचायत कार्यालय में प्रथम अपील दायर की। सुनवाई के दौरान 21 नवंबर 2024 को जिला पंचायत सीईओ ने 10 दिनों के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने का आदेश जारी किया। इसके बावजूद जनपद सीईओ ने आदेश की अनदेखी करते हुए स्पष्ट कहा कि “ज़रूरी नहीं कि हर आदेश का पालन किया जाए।”
प्रशासनिक लापरवाही या भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश? पाली जनपद सीईओ द्वारा सूचना देने से इनकार किए जाने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि कहीं वे किसी भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश तो नहीं कर रहे? सूचना के अधिकार कानून का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और सरकारी कामकाज को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना है, लेकिन जब अधिकारी ही आदेशों की अवहेलना करें, तो यह कानून आम नागरिकों के लिए अप्रभावी हो जाता है।
आरटीआई कार्यकर्ता विजय दुबे ने इस मामले को लेकर जिला कलेक्टर और मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग से शिकायत करने की बात कही है। अब देखना होगा कि उच्च अधिकारी इस पर क्या कार्रवाई करते हैं।







