पाली : सरकारी अस्पताल का बेड़ा गर्ग :  डॉक्टर नदारद, परेशानी में मरीज, जचकी का 5 से 10 हजार रकम निर्धारित, सामुदायिक स्वास्थ्य के नाम पर रेफर सेंटर बना अस्पताल

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प्रभारी बीएमओ के कमाउपन रवैये से मरीज बेहाल और अस्पताल बदमान


कोरबा/पाली । जिले के पाली नगर में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निष्क्रिय अधिकारी एवं बेलगाम डाँक्टरों की वजह से यह अस्पताल वर्तमान में इलाज में खानापूर्ति का स्थान बनकर रह गया है, जहां के चिकित्सक भगवान नही अपितु यमराज बनकर अपने कर्तव्यों का खानापूर्ति कर रहे है।

बता दें कि पाली का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नाम मात्र का प्रख्यात है, जहां के डाँक्टरों ने अपने कुकृत्य से इस अस्पताल के साथ शासन का नाम भी डुबो दिया है। शासन सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधा और सस्ते उपचार के लिए जी तोड़ प्रयास कर रही है और पैसा पानी की तरह बहा रही है, वहीं पाली सरकारी अस्पताल के अधिकारी से लेकर कर्मचारी अपनी मनमर्जी करते हुए शासन के स्वास्थ्य योजना का लुटिया डुबोने में लगे है।

इस अस्पताल में स्टाफ की मनमानी चरम पर है जिसके कारण रात्रि के मरीजों को बेहद तकलीफों से गुजरना पड़ता है। आंखों के डाँक्टर की नियुक्ति है लेकिन कब बैठते है कोई अता- पता नही। दिन और रात किन- किन डाँक्टरों की ड्यूटी लगी, यहां के प्रभारी बीएमओ डॉ. अनिल सराफ को भी मालूम नही रहता, क्योंकि वे ज्यादातर अपने निज निवास में निजी प्रेक्टिस को महत्त्व देते है और अस्पताल में उनके नीचे के अधिकारी- कर्मचारी अपनी मनमानी को अंजाम देते है। हालात यह हो चला है कि सामान्य जचकी का पांच हजार तो आपरेशन का दस से बीस हजार का रेट तय है।

यदि ऐसा नही हुआ तो तमाम डरावने बात करके गर्भवती मरीज को बाहर रेफर कर दिया जाता है। जो निजी अस्पताल का शरण लेने मजबूर रहते है। एक समय था जब बीएमओ रहे डां. सी एल रात्रे के समय में अस्पताल व्यवस्था प्रबंधन प्रशासनिक तरीके से संचालित होने के साथ उपचार के मामले में पाली का यह सरकारी अस्पताल ब्लाक क्षेत्र में ख्यातिमान था, लेकिन जब से डॉ. अनिल सराफ को बीएमओ का चार्ज मिला है अस्पताल व्यवस्था अस्त- व्यस्त हो चला है।

भर्ती मरीज तकलीफ से कराहते नजर आते है तो डाँक्टरों के ड्यूटी का कोई टाइम- टेबल नही रहा। मनमौजी तरीके से पाली अस्पताल का संचालन हो रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यजनक पहलू है। उदाहरण के लिए आंखों का चेकअप कराने के लिए एक व्यक्ति लगातार तीन दिन से इस सरकारी अस्पताल का चक्कर लगा रहा है, पर न आंखों के डाँक्टर से मुलाकात होती है और न ही सरकारी उपचार हो पा रहा है। इससे आप समझ सकते है कि पाली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल क्या होगा।

क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि वे इस दिशा में कठोरतम कदम उठाते हुए चिकित्सालय की व्यवस्था को दुरुस्त करने में आवश्यक कदम उठाए ताकि इस चिकित्सालय में आए परेशान मरीजों का सरकारी अस्पताल पर विश्वास जम सके।

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