‘वन भूमि पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण से बाढ़ का खतरा बढ़ा’: केंद्र सरकार

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बाढ़ संकट: असम-बिहार में जलभराव की विकट स्थिति, प्राकृतिक जलमार्गों पर अतिक्रमण बना बड़ा कारण

➡️ जल शक्ति मंत्रालय ने जताई चिंता, अनियमित शहरी विकास और जलनिकासी की कमी को बताया जिम्मेदार

नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा बाढ़ नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों के बावजूद असम, बिहार और कई अन्य राज्यों में बाढ़ की गंभीर समस्या बनी हुई है। इसका मुख्य कारण प्राकृतिक जलमार्गों पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण बताया जा रहा है। जल शक्ति मंत्रालय ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अपर्याप्त शहरी जल निकासी प्रणालियां और अनियंत्रित विकास कार्य स्थिति को और बिगाड़ रहे हैं।

बढ़ती बारिश और जलवायु परिवर्तन से बढ़ा खतरा

मंत्रालय के अनुसार, अप्रत्याशित जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश की तीव्रता और अवधि में बदलाव हो रहा है। लगातार हो रहे भूस्खलन, ग्लेशियरों के पिघलने, बादल फटने और अत्यधिक वर्षा के कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ की घटनाएं बढ़ी हैं।

असम में सबसे ज्यादा अतिक्रमण, सरकारी आंकड़ों से खुलासा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, असम में वन भूमि पर सबसे अधिक अतिक्रमण दर्ज किया गया है, जहां 2.13 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर अवैध कब्जा है। पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. केके पांडे के अनुसार, असम की कई आर्द्रभूमियां अतिक्रमण और जल निकायों में गाद जमने के कारण नष्ट हो चुकी हैं।

वन भूमि पर अतिक्रमण: महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर

वन भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में महाराष्ट्र (57,554.87 हेक्टेयर) दूसरे स्थान पर है, जबकि अरुणाचल प्रदेश (53,499.96 हेक्टेयर) तीसरे स्थान पर है। इसके अलावा, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, त्रिपुरा और सिक्किम में भी वन भूमि पर अतिक्रमण के मामले दर्ज किए गए हैं।

बाढ़ नियंत्रण के प्रयास और पंचवर्षीय योजनाएं

बाढ़ प्रबंधन परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है, जबकि केंद्र सरकार आर्थिक सहायता प्रदान करती है। फरवरी 2024 में, केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2021-26 तक “बाढ़ प्रबंधन और सीमा क्षेत्र कार्यक्रम (FMBAP)” को जारी रखने की मंजूरी दी

  • असम को केंद्र से सहायता: अब तक 142 बाढ़ प्रबंधन परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 111 पूरी हो चुकी हैं। असम को 1557.04 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता दी गई है।
  • बिहार को केंद्रीय सहायता: बिहार की 48 परियोजनाओं में से 42 पूरी हो चुकी हैं। बिहार को अब तक 1624.04 करोड़ रुपये की सहायता मिली है।

नेपाल से आने वाली नदियां बनीं बाढ़ का कारण

बिहार और उत्तर प्रदेश में बाढ़ का प्रमुख कारण नेपाल से आने वाली नदियां हैं, जिनमें गंडक, कोसी, कमला, बागमती, बूढ़ी गंडक, राप्ती और घाघरा शामिल हैं। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश से नदियों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे भारत के मैदानी इलाकों में भारी तबाही होती है।

भारत-नेपाल के बीच सहयोग से समाधान की कोशिश

जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, भारत और नेपाल के बीच बाढ़ नियंत्रण को लेकर संयुक्त तकनीकी समितियां कार्यरत हैं। नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से वास्तविक समय के मौसम संबंधी आंकड़ों की उपलब्धता बाढ़ पूर्वानुमान की प्रभावशीलता को बढ़ा सकती है।

निष्कर्ष

बाढ़ से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर दीर्घकालिक समाधान निकालने होंगे। अनियंत्रित शहरीकरण, वन भूमि पर अतिक्रमण और जल निकासी की अव्यवस्था को दूर किए बिना बाढ़ की समस्या का समाधान संभव नहीं है। जल संसाधनों का सतत प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग इस चुनौती से निपटने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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