रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा में डिजिटल मीडिया की उपेक्षा का मुद्दा गरमाया। पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने सदन में वेब न्यूज पोर्टल और यूट्यूब चैनलों को सरकारी विज्ञापन से वंचित रखने का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में डिजिटल मीडिया की अहम भूमिका होने के बावजूद, विज्ञापन का बड़ा हिस्सा सिर्फ कुछ संस्थानों को दिया जा रहा है।
सरकार से पूछा सवाल – डिजिटल मीडिया के साथ भेदभाव क्यों?
विधानसभा में चर्चा के दौरान विधायक भावना बोहरा ने सरकार से सीधा सवाल किया कि जब डिजिटल मीडिया की पहुंच और प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, तो उसे सरकारी विज्ञापन नीति में उचित स्थान क्यों नहीं दिया जा रहा? उन्होंने मांग की कि वेब न्यूज पोर्टल और यूट्यूब चैनलों को भी विज्ञापन नीति में समान अवसर मिले।
RTI से खुलासा – पूर्ववर्ती सरकार में अपनों को बांटे गए करोड़ों के विज्ञापन
डिजिटल मीडिया से जुड़े संगठन “मीडिया सम्मान परिवार” द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत खुलासा किया गया कि पूर्ववर्ती सरकार ने करोड़ों के सरकारी विज्ञापन केवल कुछ गिने-चुने संस्थानों को दिए। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भी यह भेदभाव जारी रहने पर डिजिटल मीडिया संचालकों में रोष है।
विधायक बोहरा की पहल का असर – बजट में हुई कटौती
भावना बोहरा की इस प्रभावशाली पहल के चलते वर्ष 2024-25 के बजट में इस मद में कटौती की गई, जिससे भविष्य में डिजिटल मीडिया को सरकारी विज्ञापनों में उचित भागीदारी मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
“मीडिया सम्मान परिवार” ने विधायक बोहरा को दिया सम्मान
भावना बोहरा द्वारा डिजिटल मीडिया के समर्थन में उठाए गए इस मजबूत कदम को लेकर “मीडिया सम्मान परिवार” ने उन्हें “उत्कृष्ट विधायक” के रूप में सम्मानित करने की घोषणा की। संगठन ने उनके प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा,
“विधायक भावना बोहरा ने डिजिटल मीडिया के हक में जो कदम उठाया है, वह सराहनीय है। इससे वेब न्यूज पोर्टल और यूट्यूब चैनलों को न्याय की उम्मीद जगी है। हम उनके प्रयास की सराहना करते हैं।”
अब सरकार के कदमों पर नजर
अब सभी की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी है। सवाल यह है कि क्या डिजिटल मीडिया को सरकारी विज्ञापन नीति में उचित स्थान मिलेगा या फिर यह मुद्दा सिर्फ चर्चा तक सीमित रह जाएगा? फिलहाल, विधायक भावना बोहरा की पहल ने डिजिटल मीडिया के लिए एक नई उम्मीद जगा दी है।









