पाली (कोरबा)। स्थानीय वैष्णव निवास में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह यज्ञ के पांचवे दिन कथावाचक नारायण महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से लेकर बाल लीलाओं और छप्पन भोग तक की दिव्य कथाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा स्थल पर श्रद्धालु मुरलीधर के बालरूप की लीलाओं का श्रवण कर भक्ति-सागर में डूबते नजर आए।
कथावाचक ने प्रवचन में कहा कि बिना भाव के भगवान किसी भेंट को स्वीकार नहीं करते, लेकिन यदि सच्चे मन से एक फूल भी अर्पित किया जाए तो भगवान प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जन्म के समय कंस को जब श्रीकृष्ण के जन्म की सूचना मिली तो वह कारागार पहुँचा और कन्या को पत्थर पर पटकने चला, लेकिन कन्या आकाश में चली गई और बोली — “तेरा विनाशक ब्रज में जन्म ले चुका है।” इसके बाद कंस ने कई राक्षस भेजे, मगर सभी असफल रहे।
पूतना वध, माखन चोरी, गोपियों संग लीलाएं और गोवर्धन लीला का मनोहारी वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि बालकृष्ण का नटखटपन सभी का मन मोह लेता है। यशोदा मां के पास माखन चोरी की शिकायतें आतीं तो कृष्ण मासूमियत से कहते — “मैया, मैंने माखन नहीं खाया।”
गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनाते हुए बताया गया कि जब इंद्रदेव से नाराज होकर श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा का सुझाव दिया तो इंद्र ने घनघोर बारिश कर दी। तब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों को बचाया। तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू हुई।
कथा के अंत में नारायण महाराज ने कहा — “भगवान की लीलाएं मानव जीवन को धर्म, भक्ति और धैर्य की प्रेरणा देती हैं।” श्रद्धालुओं ने पूरे भाव से कथा श्रवण कर छप्पन भोग उत्सव में भागीदारी की और भगवान के चरणों में भक्ति निवेदित की।









