हाथियों की मौत पर हाईकोर्ट में सुनवाई: छत्तीसगढ़ में बढ़ रहा शिकार और तस्करी का खतरा

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बिलासपुर हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर मांगी रिपोर्ट, राज्य सरकार को दो सप्ताह का समय

छत्तीसगढ़ के जंगलों में हाथियों के शिकार और तस्करी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाथी दांत की भारी मांग और ऊंची कीमतों के कारण शिकारी सक्रिय हो गए हैं। जंगलों में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष का फायदा उठाकर शिकारियों द्वारा हाथियों को निशाना बनाया जा रहा है। इसी बीच, रायगढ़ जिले के घरघोड़ा फॉरेस्ट रेंज में करंट लगने से तीन हाथियों की मौत के मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है।

हाथियों की शिकार और तस्करी से बढ़ा खतरा

छत्तीसगढ़ के जंगलों में हाथियों की बढ़ती आवाजाही के साथ शिकारियों की सक्रियता भी बढ़ गई है। वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाथी दांत की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक होने के कारण शिकारी हाथियों को निशाना बना रहे हैं। जंगलों में बिजली करंट, जहर और अन्य अवैध तरीकों से हाथियों को मारा जा रहा है।

करंट से हो रही हाथियों की मौत, जांच में शिकारियों की भूमिका संदिग्ध

रायगढ़ के घरघोड़ा फॉरेस्ट रेंज और मुंगेली के अचानकमार फॉरेस्ट रेंज में करंट लगने से हाथियों की मौत के मामले सामने आए हैं। प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ है कि शिकारियों ने जानबूझकर बिजली की लाइनें बिछाकर हाथियों को मारा है।

बिलासपुर हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

बिलासपुर हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र अग्रवाल की खंडपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने कर्नाटक हाथी टास्क फोर्स की गाइडलाइन के अनुपालन और राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। महाधिवक्ता ने कोर्ट से समय की मांग की, जिस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर शपथ पत्र पेश करने का निर्देश दिया है।

10 सालों में 167 हाथियों की मौत, 62 करंट से मरे

पिछले एक दशक में छत्तीसगढ़ सरकार ने हाथियों के संरक्षण पर 150 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, लेकिन इसके बावजूद 167 हाथियों की मौत हो चुकी है। इनमें से 62 हाथियों की मौत बिजली करंट से हुई है, जबकि दो हाथियों को जहर देकर मारा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से अधिकांश घटनाओं में शिकारियों की संलिप्तता है।

सरकार और वन विभाग पर उठ रहे सवाल

हाथियों की लगातार हो रही मौतों ने राज्य सरकार और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शिकार और तस्करी पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले वर्षों में हाथियों की संख्या में भारी गिरावट हो सकती है। हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद अब यह देखना होगा कि सरकार हाथियों के संरक्षण के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई करती है।

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