रायपुर/कोरबा। विशेष रिपोर्ट।
रायपुर/कोरबा। Vachannews छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से उठी ‘जंगल, जीव और जन-अधिकार’ की आवाज़ अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंचने जा रही है। 21 दिनों में लगभग 1200 किलोमीटर की पदयात्रा पूरी करने वाले युवा पर्यावरण प्रहरी राजकमल यादव और चंद्रशेखर पांडे ने अपने ऐतिहासिक अभियान के समापन के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की इच्छा जताई है।

इसी उद्देश्य से दोनों युवाओं ने रायपुर में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात कर पूरे आंदोलन की जानकारी साझा की। हसदेव अरण्य, जंगल, वन्यजीव और स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए किए गए इस संघर्ष को सुनने के बाद भूपेश बघेल ने दोनों युवाओं के जज़्बे की खुलकर सराहना की।
उन्होंने कहा कि “आज जब प्रकृति और पर्यावरण पर लगातार संकट बढ़ रहा है, तब छत्तीसगढ़ के इन युवाओं ने जिस साहस और प्रतिबद्धता के साथ जंगल, जीव और जन-अधिकार की लड़ाई लड़ी है, वह पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। आने वाले वर्षों में इस संघर्ष को छत्तीसगढ़ याद रखेगा।”

सम्मान, सराहना और राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का भरोसा
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजकमल यादव और चंद्रशेखर पांडे का सम्मान करते हुए उन्हें शाबाशी दी तथा उनके इस जनहित अभियान के लिए पुरस्कार स्वरूप आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी से चर्चा कर दोनों युवाओं की मुलाकात के लिए समय भी मांगा, ताकि हसदेव और छत्तीसगढ़ के जंगलों की आवाज़ सीधे राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंच सके।
युवाओं ने जताया आभार
इस सम्मान से अभिभूत दोनों युवाओं ने भूपेश बघेल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका संघर्ष किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि जल, जंगल, ज़मीन, वन्यजीव और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए है। उनका उद्देश्य है कि हसदेव की पीड़ा और छत्तीसगढ़ की जनता की आवाज़ देश के सर्वोच्च मंच तक पहुंचे।
इतिहास में दर्ज होगी यह पदयात्रा
30 जून 2026 को कटघोरा (कोरबा) से शुरू होकर 20 जुलाई 2026 को दिल्ली पहुंची यह पदयात्रा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, आदिवासी अधिकार और जनभागीदारी का ऐसा जनआंदोलन बन गई है, जिसने पूरे देश का ध्यान छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित किया है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राहुल गांधी से प्रस्तावित मुलाकात कब होती है और इस जनआंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर किस तरह नई दिशा मिलती है।








