शादी का झांसा देकर यौन शोषण मामला : पीड़िता ने पुलिस पर पक्षपात का लगाया आरोप, Zero FIR बनी सुर्खियों में

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रायपुर/राजधानी। राजधानी रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र में दर्ज Zero FIR नंबर 495/25 ने एक बार फिर समाज में महिलाओं के साथ छल, विश्वासघात और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा है, जिस पर एक महिला ने शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार, आरोपी रवि शंकर सिंह ठाकुर ने स्वयं को तलाकशुदा बताते हुए पीड़िता से नज़दीकी बढ़ाई। उसने विवाह का वादा कर लगभग आठ से नौ महीने तक पीड़िता को विश्वास में लेकर शारीरिक संबंध बनाए। लेकिन जब महिला ने विवाह की बात दोहराई, तो आरोपी टालमटोल करने लगा और धीरे-धीरे उससे संपर्क तोड़ दिया।

पीड़िता का कहना है कि आरोपी का असली चेहरा तब सामने आया जब उसने विवाह से साफ इंकार कर दिया और धमकी देना शुरू कर दिया। महिला ने थकहारकर टिकरापारा थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने Zero FIR के तहत मामला पंजीबद्ध किया।

🔹 पुलिस पर पक्षपात का आरोप

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जप्त कर लिया है, लेकिन कई सप्ताह बीत जाने के बावजूद उसे फॉरेंसिक लैब नहीं भेजा गया है। उनका कहना है कि—

“मेरे फोन में मेरे निजी जीवन, रिश्तेदारों, बैंकिंग और बच्चों की पढ़ाई से जुड़े जरूरी दस्तावेज और नंबर हैं। पुलिस ने फोन ले लिया लेकिन कोई अपडेट नहीं दिया। ऐसा लग रहा है कि जांच को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है।”

पीड़िता का यह भी कहना है कि स्थानीय राजनीतिक दबाव के कारण पुलिस आरोपी के प्रति नरमी बरत रही है और मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश हो रही है।

🔹 राजनीतिक संरक्षण का शक

सूत्रों के अनुसार, आरोपी रवि शंकर सिंह ठाकुर के कुछ स्थानीय राजनीतिक व्यक्तियों से संबंध बताए जा रहे हैं। पीड़िता का आरोप है कि यही कारण है कि अब तक जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।

🔹 पीड़िता की मांग

महिला ने जिला पुलिस अधीक्षक और राज्य महिला आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है। उसने यह भी कहा है कि—

“अगर न्याय नहीं मिला, तो मैं मुख्यमंत्री और महिला आयोग तक अपनी बात रखूंगी। मेरा सिर्फ एक निवेदन है कि मेरा फोन फॉरेंसिक लैब भेजा जाए और मुझे जल्द वापस दिया जाए।”

🔹 सामाजिक सवाल

यह मामला न केवल शादी का झांसा देकर यौन शोषण के मामलों की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे जांच एजेंसियों की लापरवाही और राजनीतिक प्रभाव न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति ने झूठे वादे के तहत यौन संबंध बनाए और बाद में विवाह से इंकार किया, तो यह बलात्कार (IPC की धारा 376) के दायरे में आ सकता है। वहीं, पुलिस की निष्क्रियता पीड़ित पक्ष के विश्वास को और कमजोर करती है।

🔹 निष्कर्ष

राजधानी रायपुर में दर्ज यह मामला सिर्फ एक महिला की पीड़ा नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस निष्पक्ष जांच करते हुए आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करती है या यह मामला भी अन्य “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा।

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