छत्तीसगढ़ । छत्तीसगढ़ में सहकारी सोसाइटियों के प्रबंधक, खरीदी प्रभारी और ऑपरेटरों की हड़ताल बुधवार को आठवें दिन भी जारी रही। 3 नवंबर से जारी यह आंदोलन अब राज्य सरकार की धान खरीदी तैयारियों पर बड़ा असर डाल रहा है।
सरकार ने 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की घोषणा की है, लेकिन हड़ताल के चलते तैयारी अधूरी रह गई है। धान खरीदी सॉफ्टवेयर का ट्रायल रन नहीं हो सका है और किसानों को टोकन जारी करने की प्रक्रिया ठप पड़ी है। कई जिलों में प्रशासन को मजबूरी में सहकारी बैंकों के अधिकारी और मार्कफेड के प्रोग्रामर से सॉफ्टवेयर का परीक्षण करवाना पड़ रहा है।
खाद्य विभाग ने स्थिति से निपटने के लिए सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि हड़ताल जारी रहने की स्थिति में राजस्व, कृषि और सहकारिता विभाग के कर्मचारी धान खरीदी केंद्रों में सोसाइटी प्रबंधक की भूमिका निभाएं। प्रत्येक जिले में वैकल्पिक ड्यूटी तय की जा रही है ताकि 15 नवंबर से खरीदी प्रक्रिया प्रभावित न हो।
सरकार ने अब हर सोसाइटी के प्राधिकृत अधिकारियों को केंद्र संचालन की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी है। उन्हें धान खरीदी, रिकॉर्ड रखरखाव और संचालन से जुड़े सभी कार्यों का उत्तरदायित्व दिया गया है।
हालांकि कृषि विभाग ने धान खरीदी में अपने कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने से इनकार कर दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कृषि अमला वर्तमान में रबी वर्ष 2025-26 के लक्ष्य पूरे करने में व्यस्त है और केवल सीमित अधिकारी निरीक्षण कार्य के लिए लगाए जा सकते हैं।
इधर, हड़ताली कर्मियों और शासन के बीच हुई वार्ता विफल रही है। कर्मचारी अपने वेतनमान और सेवा स्थायित्व की मांगों पर अड़े हुए हैं। वहीं शासन खरीदी व्यवस्था को किसी भी हालत में बाधित न होने देने के लिए वैकल्पिक इंतजामों पर निर्भर है।







