ब्रेकिंग न्यूज़ : धान खरीदी से पहले मुंगेली में बवाल कृषि अधिकारियों के विरोध से प्रशासन की तैयारी पर सवाल, 15 नवंबर से पहले बढ़ा टकराव

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मोचन सिंह सोनवानी की कलम से……✍🏻

धान खरीदी से पहले मुंगेली में मचा प्रशासनिक हड़कंप, कृषि विभाग के कृषि अधिकारियों ने किया विरोध, कहा- हमारा काम किसानों की योजनाएं, न कि धान खरीदी की ड्यूटी! कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी



खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होने जा रही है। जिला प्रशासन ने 66 समितियों के 105 उपार्जन केन्द्रों में सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देश पर पारदर्शिता और निगरानी के लिए विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे, GPS ट्रैकिंग और बायोमैट्रिक सिस्टम तक की व्यवस्था की गई है। किसानों में उत्साह है, टोकन कटने लगे हैं और केंद्रों पर पेयजल, छाया व बैठक की सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। लेकिन धान खरीदी की तैयारी के बीच अब प्रशासन के सामने कृषि विभाग के कर्मचारियों का विरोध नया सिरदर्द बन गया है।

दरअसल, जिले के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, ग्रामीण मृदा विज्ञान अधिकारी और कृषि विकास अधिकारी ने संयुक्त रूप से कलेक्टर को आवेदन सौंपकर धान खरीदी में प्रभारी अधिकारी / नोडल अधिकारी / ट्रस्टेड पर्सन के रूप में लगाई जा रही ड्यूटी का कड़ा विरोध किया है। आवेदन में लिखा है कि पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी कृषि विभाग के फील्ड अफसरों को धान उपार्जन केंद्रों में लगाया गया है, जबकि शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश हैं कि कृषि विभाग के अधिकारी इस कार्य में संलग्न नहीं किए जाएं।

इस दौरान कृषि विभाग के पास पहले से ही कई महत्वपूर्ण और समयबद्ध कार्य चल रहे हैं जैसे रबी फसल के लक्ष्य, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में 100% एग्री-स्टैक पंजीयन, पीएम फसल बीमा योजना के तहत फसल कटाई प्रयोग, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड और बीमा प्रोत्साहन कार्य आदि।

आवेदन में यह भी कहा गया है कि धान खरीदी में लगाए जाने से विभाग की फ्लैगशिप योजनाएं गंभीर रूप से प्रभावित होंगी। यदि कृषि अधिकारियों को उपार्जन कार्य से पृथक नहीं किया गया तो सभी अधिकारी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।



कृषि अधिकारियों का कहना है कि कृषि विभाग का मूल दायित्व किसान उत्पादन, बीज वितरण, मिट्टी परीक्षण और फसल बीमा जैसे कार्यों पर केंद्रित है। धान खरीदी में उनकी ड्यूटी लगाने से न केवल विभागीय कार्य बाधित होते हैं बल्कि योजनाओं की समय सीमा भी प्रभावित होती है।

प्रशासन की तैयारी पूरी, लेकिन असंतोष बढ़ा जिला प्रशासन जहां एक ओर पारदर्शी खरीदी की तैयारी में जुटा है वहीं दूसरी ओर इस विरोध से प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कलेक्टर कार्यालय से जारी पत्रों में कृषि अधिकारियों को विभिन्न केंद्रों पर प्रभारी और नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है।

अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन कृषि विभाग की मांग पर पुनर्विचार करेगा, या फिर तय तिथि 15 नवंबर से सभी अधिकारी उपार्जन केंद्रों पर ड्यूटी देंगे?

किसानों की निगाहें अब दो दिशाओं में एक तरफ खरीदी केंद्रों की तैयारी, दूसरी तरफ प्रशासन और कृषि विभाग के बीच बढ़ते टकराव पर। किसानों का कहना है कि वे चाहते हैं कि खरीदी सुचारू रूप से हो, लेकिन अधिकारियों के बीच के विवाद से प्रक्रिया पर असर नहीं पड़ना चाहिए।

अब जिले में चर्चा का विषय धान खरीदी की पारदर्शिता पर प्रशासन का ज़ोर या कृषि विभाग की चेतावनी में कितना दम? 15 नवंबर से शुरू हो रही खरीदी से पहले यह विवाद निश्चित ही प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।

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