बड़ा खुलासा: चोरकाडांड़ हादसे में मौत का कारण बदला गया? पेड़ गिरने से हुई मौत को रिकॉर्ड में ‘गाज गिरना’ बताया, मुआवजे पर उठे सवाल

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कोरबा/पाली विशेष रिपोर्ट।

 

 

 

कोरबा जिला के पाली विकासखंड के ग्राम चोरकाडांड़ में 30 मई को आंधी-तूफान के दौरान धौंरा पेड़ गिरने से तीन युवकों की दर्दनाक मौत हो गई थी। प्रशासन की जांच में भी पेड़ गिरने से मौत की पुष्टि हुई, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में मौत का कारण “गाज गिरना” दर्ज कर मुआवजा प्रक्रिया शुरू किए जाने से सवाल खड़े हो गए हैं। जब दोनों स्थितियों में समान मुआवजा राशि का प्रावधान है, तो आखिर वास्तविक कारण बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?

 

 

 

कोरबा। जिला के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पहाड़गांव के आश्रित मोहल्ला चोरकाडांड़ में हुए दर्दनाक हादसे को लेकर नया विवाद सामने आया है। 30 मई को तेज आंधी-तूफान के दौरान धौंरा पेड़ गिरने से तीन युवकों की मौत हुई थी, लेकिन अब राजस्व अभिलेखों में मौत का कारण “आकाशीय बिजली (गाज) गिरना” दर्ज किए जाने की तैयारी होने की जानकारी सामने आई है।

 

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, 14 वर्षीय शिवराम टेकाम, 17 वर्षीय दिनेश तिर्की और कमलेश बड़ा तेज आंधी और बारिश से बचने के लिए एक विशाल धौंरा पेड़ के नीचे खड़े थे। तभी तेज हवाओं के कारण पेड़ जड़ से उखड़कर उन पर गिर पड़ा। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला और पाली अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

 

घटना के बाद जिला प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में भी स्पष्ट रूप से पेड़ गिरने से मौत होने की पुष्टि की गई। इसके बावजूद सूत्रों के अनुसार राजस्व विभाग मुआवजा प्रकरण में मौत का कारण “गाज गिरना” दर्ज कर रहा है।

बड़ा सवाल: जब जांच रिपोर्ट, पंचनामा और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पेड़ गिरने से मौत की पुष्टि करते हैं, तो सरकारी रिकॉर्ड में तथ्य क्यों बदले जा रहे हैं? जबकि राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी 6-4) के तहत आंधी-तूफान में पेड़ गिरने से मृत्यु और आकाशीय बिजली से मृत्यु—दोनों ही प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में आती हैं तथा दोनों मामलों में ₹4-4 लाख मुआवजे का समान प्रावधान है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मुआवजा प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए रिकॉर्ड में बदलाव किया जा रहा है, या फिर इसके पीछे कोई और वजह है? तीन परिवारों के चिराग बुझ चुके हैं, ऐसे में पीड़ित परिवारों को पारदर्शिता के साथ शीघ्र सहायता मिलना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

 

नायब तहसीलदार ने नहीं उठाया फोन

 

मामले की जानकारी लेने के लिए प्रकरण देख रही नायब तहसीलदार रसिका अग्रवाल से मोबाइल पर दो बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया और न ही बाद में कॉल बैक किया।

 

 

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