जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में नौगाम पुलिस स्टेशन के पास देर रात हुआ एक भीषण धमाका पूरे शहर को दहला गया। इस भयानक विस्फोट में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। धमाका इतना ज़ोरदार था कि कई वाहन जलकर राख हो गए और पुलिस थाने की इमारत का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाके की गूंज कई किलोमीटर तक सुनाई दी और धमाके के बाद आसमान में काले धुएं और आग की ऊंची लपटें उठने लगीं। आसपास के घरों की खिड़कियाँ तक कांप उठीं और चिंगारियां दूर-दूर जाकर गिरीं, जिससे अलग-अलग स्थानों पर आग लगने की खबर मिली।
धमाके में शवों के अंग 300 फीट दूर तक बिखरे
धमाके की तीव्रता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि शवों के चिथड़े 300 फीट दूर तक बिखरे मिले। पुलिस, फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोगों ने मिलकर आग बुझाने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में कठिन मशक्कत की। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
सील किए जा रहे विस्फोटक में हुआ ब्लास्ट
फॉरेंसिक (FSL) टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। प्राथमिक जांच के मुताबिक, धमाका ठीक उसी समय हुआ जब मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस जांच में बरामद 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट को सील कर रही थी।
यह वही विस्फोटक है जो दिल्ली कार धमाके से पहले पकड़े गए जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े टेरर मॉड्यूल के दौरान डॉ. मुझम्मिल गनई के फरीदाबाद स्थित किराये के घर से बरामद किया गया था। संदेह है कि थाना परिसर में खड़ी जब्त की गई एक कार में लगाए गए IED ने अमोनियम नाइट्रेट के पूरे जखीरे को डेटोनेट कर दिया, जिससे इतना बड़ा धमाका हुआ।
जैश के शैडो ग्रुप PAFF ने ली जिम्मेदारी
इस धमाके की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े शैडो ग्रुप PAFF (पीपुल्स एंटी-फ़ासिस्ट फ़ोर्स) ने ली है। इसे एक आतंकी हमला मानकर जांच तेज़ कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां CCTV फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की मदद से पूरे मामले को खंगाल रही हैं।
धमाका रात 11:22 बजे हुआ, और कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका सुरक्षाबलों द्वारा घेर लिया गया। आतंक की आशंका को देखते हुए आसपास के क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी किया गया है।
जांच तेजी से जारी
फिलहाल NIA, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से जांच में जुटी हैं। यह घटना देशभर में सुरक्षा व्यवस्थाओं पर फिर से बड़े सवाल खड़े करती है, क्योंकि धमाका पुलिस स्टेशन परिसर के भीतर हुआ, जहां भारी सुरक्षा मौजूद होती है।









