दुबई एयर शो के दौरान भारतीय वायुसेना के तेजस विमान के क्रैश में पायलट नमंश स्याल शहीद हो गए। इजेक्ट तकनीक क्यों फेल होती है और क्या है इसका महत्व—पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
दुबई में दर्दनाक हादसा, तेजस क्रैश से मचा हड़कंप
दुबई एयर शो में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब भारतीय वायु सेना का हल्का लड़ाकू विमान Tejas crash का शिकार हो गया। दर्शकों के कैमरों में रिकॉर्ड हुए वीडियो में दिखा कि विमान अचानक नियंत्रण खो बैठा और देखते ही देखते आग की लपटों में तब्दील हो गया। हादसे में 34 वर्षीय पायलट नमंश स्याल ने अपनी जान गंवा दी। fighter jet होने के बावजूद इजेक्ट तकनीक समय पर काम नहीं कर सकी।
घटनास्थल से उठे काले धुएं के गुबार
वीडियो में साफ दिखा कि तेज टक्कर के बाद घटनास्थल से काले धुएं का बड़ा गुबार उठा। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, विमान इतनी तेज गति में था कि पायलट के पास eject system सक्रिय करने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नगरोटा के रहने वाले नमंश स्याल अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी थे जो भारतीय वायुसेना में सेवा दे रहे थे। उनकी पत्नी भी वायुसेना में तैनात हैं और उनके पिता IAF से रिटायर हैं।
इजेक्ट तकनीक क्या है और क्यों होती है इतनी जरूरी?
इजेक्ट तकनीक लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाली एक अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली है, जिसका उद्देश्य किसी भी संभावित Tejas crash या आपात स्थिति में पायलट की जान बचाना है। पायलट की सीट के नीचे मौजूद ‘रॉकेट पावर सिस्टम’ सक्रिय होते ही सीट को लगभग 30 मीटर ऊपर हवा में छोड़ देता है, जिसके बाद पैराशूट खुलता है और पायलट सुरक्षित जमीन पर उतर सकता है।
हर बार क्यों नहीं बचा पाता पायलट की जान?
विशेषज्ञ बताते हैं कि fighter jet दुर्घटनाओं में कई बार विमान का ढांचा या सिस्टम इतने तेजी से क्षतिग्रस्त होता है कि eject system सक्रिय ही नहीं हो पाता। कई बार क्रैश की गति इतनी अधिक होती है कि पायलट को प्रतिक्रिया देने के लिए समय नहीं मिलता। कुछ मामलों में इजेक्शन के दौरान लगने वाला झटका भी बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, जिससे गंभीर चोटें या मौत तक की स्थिति बन सकती है।
तेजस के पिछले मामलों में इजेक्ट सिस्टम ने बचाई थी जान
इससे पहले राजस्थान के जैसलमेर में हुए Tejas crash में पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर अपनी जान बचाई थी। वहीं, कई अन्य हादसों में भी यह तकनीक जीवनरक्षक साबित हुई है। यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर लड़ाकू विमानों में इस तकनीक को सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण माना जाता है।
नमंश स्याल क्यों नहीं कर सके इजेक्ट?
नमंश स्याल के मामले में शुरुआती इनपुट बताते हैं कि विमान की हाई-स्पीड और कम रिएक्शन-टाइम सबसे बड़ी बाधा बनी। तेजस के नियंत्रण खोने के बाद घटनाक्रम इतनी तेजी से हुआ कि pilot safety प्रक्रिया सक्रिय नहीं हो सकी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि तकनीकी खराबी थी या अन्य किसी कारण से इजेक्ट संभव नहीं हो पाया।
देशभर में शोक, वायुसेना को बड़ा नुकसान
इस Tejas crash ने न केवल भारतीय वायुसेना बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया है। नमंश स्याल की बहादुरी और देशसेवा को ससम्मान याद किया जा रहा है। वायुसेना ने आधिकारिक बयान जारी कर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।









