भारत में श्रमिक कल्याण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने आज से नए श्रम कानूनों को लागू कर दिया है। इन संहिताओं के लागू होने से देशभर में लाखों श्रमिक औपचारिक ढांचे में शामिल होंगे और उन्हें सामाजिक सुरक्षा से लेकर समान वेतन तक अनेक अधिकार सुनिश्चित होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर लागू ये सुधार कार्यबल के जीवन स्तर को उठाने और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माने जा रहे हैं।
गिग वर्कर्स व डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म कर्मचारियों को मिला कानूनी दर्जा
पहली बार श्रम संहिताओं में गिग वर्क, प्लेटफ़ॉर्म वर्क और एग्रीगेटर्स को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इससे ऑनलाइन डिलीवरी, कैब सर्विस, ऐप-आधारित सेवाओं जैसी डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों को औपचारिक पहचान मिल गई है।
नई व्यवस्था के अनुसार, एग्रीगेटर कंपनियों को अब अपने वार्षिक कारोबार का 1–2% एक विशेष गिग वर्कर कल्याण कोष में देना होगा, जिसकी अधिकतम सीमा श्रमिकों को दिए गए कुल भुगतान का 5% होगी। यह राशि सामाजिक सुरक्षा लाभों को मजबूत करेगी।
दुर्घटना होने पर गिग वर्कर्स को भी मिलेगा मुआवजा
डिलीवरी और मोबिलिटी सेक्टर के कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने घर और कार्यस्थल के बीच यात्रा के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को भी रोजगार से जुड़ा माना है। इससे इन कर्मचारियों को दुर्घटना मुआवजे का अधिकार मिलेगा।
एक देश–एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर
केंद्र सरकार ने श्रमिकों के लिए आधार से जुड़ा यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) लागू किया है, जिससे योजनाओं का लाभ एक राज्य से दूसरे राज्य में भी बिना बाधा मिलता रहेगा।
महिला श्रमिकों के लिए बड़े सुधार
नए श्रम कानूनों में महिला श्रमिकों की सुरक्षा व समानता को प्राथमिकता दी गई है।
- समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित किया गया है।
- महिलाओं को अब रात्रिकालीन पालियों में काम करने की अनुमति होगी, हालांकि नियोक्ता को सुरक्षा व्यवस्था और उनकी सहमति सुनिश्चित करनी होगी।
- 26 सप्ताह का सवेतन मातृत्व अवकाश, शिशुगृह सुविधाएँ और घर से काम के विकल्प उपलब्ध होंगे।
- महिला कर्मचारियों को 3,500 रुपये का चिकित्सा बोनस भी मिलेगा।
- परिवार की परिभाषा में सास-ससुर को भी शामिल किया गया है, जिससे आश्रितों को सामाजिक सुरक्षा का व्यापक दायरा मिलेगा।
सरकार की प्रतिक्रिया
श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि नए श्रम संहिता का लागू होना महज़ सुधार नहीं, बल्कि देश के हर श्रमिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रधानमंत्री मोदी की मजबूत प्रतिबद्धता का प्रतीक है।









